उत्तर प्रदेश: राम मंदिर परिसर में सभी 6 मंदिरों के साथ सप्त मंडप, कुबेर टीला और शेषावतार मंदिर के दर्शन की व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 9 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें एक नए ट्रस्टी के नाम को भी शामिल करने पर मुहर लग सकती है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति की भी बैठक 7, 8 और 9 सितंबर को होगी. मंदिर निर्माण समिति की बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. पूरी उम्मीद है कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य इस वर्ष पूरे कर लिए जाएंगे.
मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन आगामी तैयारियों को देखते हुए निर्माण कार्य को पूरा करने और दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर मंथन किया गया. लगभग 6 घंटे तक लगातार चल इस बैठक के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह तय कर लिया गया है कि परकोटा के 6 मंदिर और शेषावतार मंदिर में दर्शन की व्यवस्था अक्टूबर माह से प्रारम्भ हो जाएगी. लेकिन सप्त मंडपम में दर्शन की व्यवस्था शुरू किए जाने पर विचार किया जा रहा है.
अद्भुत है महिमा
दो अक्षर के नाम की,
भव्य श्री राम मंदिर,
कर्तव्य और उत्तरदायित्व का पवित्र प्रतीक,
जहाँ हर कदम गूँजता है,
श्री राम के सम्मान में।Behold the magnificence
of the two-lettered name,
the resplendent Bhavya Shri Ram Mandir,
a sacred symbol of duty… pic.twitter.com/erUVvK8jtB— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) August 19, 2025
हालांकि, इसके पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की व्यवस्था में सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट की मानें तो दर्शन व्यवस्था प्रारंभ होने के बाद प्रतिदिन सुरक्षा के जवानों को परिसर में हर कोने की तलाशी न करनी पड़े, इसके लिए ट्रस्ट सुरक्षा एजेंसी के साथ अध्ययन कर रहा है.
राम मंदिर में आने वाले अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की व्यवस्था भी सितंबर तक पूरा कर की ली जाएगी. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर में तीन लिफ्ट लगाई जानी हैं. इसमें उत्तर दिशा में दो और एक पश्चिम दिशा में होगी. अक्टूबर में इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा.
राम मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी में तेज धूप का जलना पैरों में बर्दाश्त नहीं हो पता इसके चलते अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पास परकोटा के बाहर शू सेंटर का निर्माण कराया गया. चंपत राय ने बताया कि इसमें एक साथ लगभग 12000 से अधिक लोग एक साथ इसके अंदर अपने जूता और चप्पल को रख सकेंगे. एक दिन लगभग एक लाख श्रद्धालु इस सुविधा को प्राप्त कर सकेंगे.
नवंबर में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजा रोहण का कार्यक्रम संपन्न होगा, जिसको लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तैयारी शुरू कर दी है. चंपत राय ने बताया कि आयोजन अयोध्या और आसपास के 25 जिलों के बीच ही सीमित रहेगा. इसके लिए इस आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की सूची तैयार की जा रही है और यह कार्यक्रम भी ऐतिहासिक माना जाएगा.
राम मंदिर पर लगने वाले फसाड लाइटिंग को लेकर तीन बड़ी कंपनियों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रेजेंटेशन दिया. मंदिर में लाइट की व्यवस्था करने वाली कंपनी को ही अगले 5 वर्ष तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस की व्यवस्था देखनी होगी. मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान लगभग 2 घंटे तक कंपनियों की प्रेजेंटेशन का कार्यक्रम चला.
अयोध्या राम मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति की कल हुई समीक्षा बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए है. इसमें राम मंदिर निर्माण स्थल पर लगाए गए पांच टाइम-लैप्स कैमरों से जो पूरी निर्माण यात्रा रिकॉर्ड हो रही है, उसे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स घोषित किया गया है. यह अधिकार शर्तनामा के साथ सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट,रुड़की को सौंपे जाएंगे, ताकि इस सामग्री का उपयोग शिक्षा-प्रशिक्षण और पांच वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा पर डॉक्यूमेंट्री तैयार करने में किया जा सके.
इसमें खुदाई, सॉइल टेस्ट से लेकर प्रस्तावों और चरणबद्ध निर्माण तक की पूरी कहानी दर्ज होगी. समीक्षा के दौरान अस्थायी मंदिर स्मारक और शहीदों की स्मृति में लगाए गए ग्रेनाइट पिलर्स के स्वरूप पर भी विस्तार से विचार किया गया. ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. निर्माण कार्य की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि अक्टूबर के अंत तक अधिकांश कार्य पूरे हो जाएंगे. वहीं, दिसंबर 2025 तक शेष कार्य भी लक्ष्य के अनुसार पूर्ण कर लेने का विश्वास जताया गया है.

