उत्तर प्रदेश

25 नवंबर को पीएम मोदी राम मंदिर पर करेंगे ध्वजारोहण, 10000 अतिथि होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश: अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के तर्ज पर एक बार फिर राम मंदिर परिसर में नवंबर में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. 23 नवंबर से लेकर 25 नवंबर तक तीन दिवसीय आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री समेत विभिन्न जाति, वर्ग से जुड़े 10 हजार अतिथि शामिल होंगे.

राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर, शेषवतार मंदिर, परकोटा के छह देवी देवताओं के साथ साथ उन ऋषि मुनियों के मंदिर का भी निर्माण पूर्ण होने के बाद प्राण प्रतिष्ठा और मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम भी संपन्न हो चुका है. अब नवंबर माह से आने वाले श्रद्धालु सभी मंदिरों में दर्शन कर सके, इसके लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सुलभ दर्शन की व्यवस्था प्रारंभ करने की तैयारी में जुड़ गया है. इसके पहले नवंबर माह में मंदिरों पर विजय ध्वजा स्थापित करने के लिए भव्य आयोजन करने जा रहा है.

इसके लिए कारसेवक पुरम में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव संपत राय, सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा, व्यवस्था प्रभारी गोपाल जी राव के साथ प्रसिद्ध कथावाचक रघुनाथ दास शास्त्री, ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा, ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश तिवारी, आचार्य इंद्रदेव मिश्र के साथ बैठक संपन्न हुआ, जिसमें संपूर्णता का यह उत्सव ध्वजारोहण के साथ मनाये जाने पर निर्णय लिया गया.

राम मंदिर परिसर में 23 नवंबर से धार्मिक अनुष्ठान और ध्वजा पूजन प्रारंभ होगा और 25 नवंबर विवाह पंचमी के दिन अभिजीत मुहूर्त में ध्वज फहराया जाएगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक, इस महोत्सव को भव्य व दिव्य स्वरूप प्रदान करने में ट्रस्ट के पदाधिकारी जुटे है. श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण अब अपनी सम्पूर्णता की ओर अग्रसर है.

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि श्री विष्णु पंचायतन की दक्षिण शैली में निर्मित यह मन्दिर समूह निर्मित होने से पहले ही लोकप्रियता के सारे कीर्तिमान स्थापित कर चुका है. अभी तक भक्त केवल प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप का ही दर्शन पा रहे है. लेकिन जून में मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित श्री गणेश, श्री हनुमान, श्री सूर्य, मां भगवती, मां अन्नपूर्णा, भगवान शिव की सहित श्री राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही ट्रस्ट निर्माण की अंतिम प्रक्रिया सौंदर्यीकरण में जुट गया है. हजारों टन मलबा हटाया जा चुका है, लेकिन अभी काफी कुछ शेष है.

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