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पीएम मोदी का वाराणसी दौरा: 2,200 करोड़ की विकास परियोजनाएं, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विजय घोष और किसानों को सौगात

उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. इस दौरान उन्होंने करीब 2,200 करोड़ की 50 से अधिक परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया. इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल, कनेक्टिविटी, पेयजल, शहरी सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं.

पीएम मोदी ने कहा काशी के मेरे मालिकों, सावन के महीने में बाबा विश्वनाथ की पूजा-अर्चना करने की इच्छा थी, लेकिन श्रद्धालुओं को असुविधा न हो इसलिए यहीं से नमन करता हूं. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि देश के किसानों के खाते में अब तक 3.9 लाख करोड़ जमा किए जा चुके हैं. यूपी के किसानों को 90,000 करोड़, जबकि बनारस के किसानों को 900 करोड़ मिले हैं. इस अवसर पर उन्होंने पीएम-किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की, जिससे देशभर के 9 करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई.

प्रधानमंत्री ने मुंशी प्रेमचंद के पैतृक आवास के पुनर्विकास, कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, और सारनाथ, रामनगर, ऋषि मांडवी क्षेत्रों में शहरी सुविधा केंद्रों की आधारशिला रखी. उन्होंने कंचनपुर में मियावाकी वन, 21 पार्कों और शहीद उद्यान के सौंदर्यीकरण, और रामकुंड-मंदाकिनी जैसे कुंडों की जल शुद्धिकरण परियोजनाओं का उद्घाटन किया.

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार काशी आया हूं. पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या ने मेरा मन दुखी कर दिया था. बाबा विश्वनाथ से वचन लिया कि मैं अपनी बहनों के सिंदूर का बदला लूंगा और वो पूरा किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब दुश्मनों के सामने काल बन चुका है और “पाकिस्तान के एयरबेस अभी भी आईसीयू में हैं.

पीएम मोदी ने काशी के मंच से स्वदेशी चीजों को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकर मंत्र को अपनाना होगा. पीएम मोदी ने कहा कि केवल वही सामान खरीदें, जिसे बनाने में किसी भारतीय का पसीना लगा है. दुनिया अस्थिर दौर से गुजर रही है, ऐसे में हमारा फर्ज है कि हम स्वदेशी माल ही खरीदें और स्वदेशी माल ही बेचें.

प्रधानमंत्री मोदी की 51वीं वाराणसी यात्रा सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं, बल्कि विकास, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संकल्प की प्रतिमूर्ति बन गई. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से लेकर किसानों, महिलाओं और दिव्यांगों तक हर तबके को कुछ न कुछ सौगात मिली. यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि काशी भारत की आध्यात्मिक राजधानी ही नहीं, अब विकास की गाथा का भी केंद्र बन चुकी है.

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