उत्तराखंड: प्रयागराज महाकुंभ संपन्न करने के बाद निरंजनी अखाड़े के साधु संत हरिद्वार पहुंच गए हैं. इस दौरान हरिद्वार वासियों ने प्रयागराज महाकुंभ संपन्न करा कर हरिद्वार पहुंचे साधु संतों का फूल मालाओं से स्वागत किया. जगह-जगह पर साधु संतों के आशीर्वाद के लिए लोगों की भीड़ एकत्र हुई.
इस दौरान निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविन्द्रपुरी ने कहा कि महाकुंभ के दौरान अखाड़े के सभी पदाधिकारी साधु संत कुंभ क्षेत्र में चले जाते हैं और होली के बाद वह वापस अपने अखाड़े द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अपने-अपने स्थान पर पहुंचते हैं. इसी कड़ी में हरिद्वार के सभी साधु संत प्रयागराज कुंभ संपन्न कराकर हरिद्वार आए हैं जिनका सभी ने स्वागत किया है.
इस दौरान निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ संपन्न होने के बाद अब हमारा अन्य कुंभों को लेकर कार्य शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अब 2027 में अर्धकुंभ हरिद्वार में है. उसके बाद नासिक और उज्जैन में भी महाकुंभ हैं, जिनकी तैयारी में अब निरंजनी अखाड़े के सभी पदाधिकारी लग जाएंगे.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस बार महाकुंभ हुआ था. महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी. महाकुंभ 26 फरवरी को संपन्न हुआ था. प्रयागराज महाकुंभ 144 साल बाद हुआ था. यूपी सरकार के अनुसार 66 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में गंगा में डुबकी लगाई. कुंभ, अर्ध कुंभ और महाकुंभ धार्मिक आयोजनों के प्रकार हैं, जो अलग-अलग समय अंतराल पर और अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होते हैं. कुंभ मेला हर 12 साल में हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में से किसी एक स्थान पर आयोजित होता है. अर्ध कुंभ हर 6 साल में प्रयागराज और हरिद्वार में आयोजित होता है. महाकुंभ 144 साल में एक बार प्रयागराज में आयोजित होता है. हरिद्वार में 2021 में कुंभ हुआ था. अब 2027 में अर्धकुंभ होना है.

