उत्तराखंड: हरिद्वार जमीन घोटाले को लेकर धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कई अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति कर दी है. बड़ी बात यह है कि एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी तक का निर्णय लिया गया है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला हुआ है.
उत्तराखंड में बड़े अफसर पर कठोर कार्रवाई को लेकर धामी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है. हरिद्वार जमीन घोटाले में करीब 54 करोड़ रुपए के लेनदेन प्रकरण पर सरकार ने IAS और पीसीएस अधिकारियों के साथ जिले के बाकी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं.
दरअसल हाल ही में विजिलेंस ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी, जिसके बाद अब मामले में कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं. विजिलेंस रिपोर्ट में हरिद्वार जमीन प्रकरण को लेकर घोटाला होने की पुष्टि हुई है. इसके बाद अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर भी बड़ी कार्रवाई हुई है.
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के संकल्प के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के…
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) June 19, 2026
हरिद्वार में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी IAS वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है. इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है. वहीं तीसरे बड़े अधिकारी पीसीएस अफसर अजय वीर की तीन वेतन वृद्धियों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं.
धामी सरकार के इस फैसले को बड़ा फैसला माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले ही इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों के अलावा एक पीसीएस और तमाम विभागीय अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है. अब विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई का फैसला भी ले लिया गया है. प्रकरण में अब विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की भी अनुमति दे दी गई है.
बता दें कि, हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में शुरू से ही मुख्यमंत्री ने सख्त रवैया दिखाया था. घोटाला सामने आने के बाद आईएएस अधिकारियों समेत अन्य बाकी के अफसरों को भी निलंबित कर दिया गया था. खास बात यह है कि इस मामले मे आपराधिक षड्यंत्र के साथ धोखाधड़ी और जमीन खरीद फरोख्त के जरिए नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृश्य साबित भी हुए.
इस मामले में अब विजिलेंस आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के साथ ही तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, और लिपिक वेदपाल के साथ मानचित्रकर रहे दिनेश कांडपाल पर भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
यही नहीं, भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज होगा. हालांकि, सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले में अभी विजिलेंस मुकदमा दर्ज करने के बाद मनी ट्रेल को पकड़ने की कोशिश करेगी और विजिलेंस के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले में संलिप्त कुछ दूसरे लोगों पर पूछताछ और मनी ट्रेल पकड़ने के बाद ही कार्रवाई कर सकती है.
