उत्तराखंड: धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेला सबाब पर है. बड़ी संख्या में दूर दराज से श्रद्धालु गंगाजल लेने पहुंच रहे हैं. बुधवार शाम तक हरिद्वार आने वाले कांवड़ियों का आंकड़ा एक करोड़ 80 लाख को पार गया है. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. जहां सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं. वहीं गंगा की उफनती लहरों के बीच वाटर एम्बुलेंस यानी लाइफ बोट भी तैनात की गई है. एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्र मिलकर कांवड़ियों की जान बचा रहे हैं. अभी तक लाइफ बोट के जरिए 25 से 30 कांवड़ियों की जान बचाई जा चुकी है.
कांवड़ मेले में लाइफ बोट को वाटर एम्बुलेंस का नाम दिया गया है. इसमें गंगा किनारे बोट को खड़ा किया गया. बोट पर एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्रों की तैनाती की गई है. जैसे ही कोई कांवड़िया गंगा में डूबता है और उसकी हालत गंभीर हो जाती है तो तत्काल उसे वाटर एम्बुलेंस (बोट) में डालकर जिला अस्तलाल के नजदीकी घाट पर ले जाया जाता है. वहां पर तैनात एम्बुलेंस के जरिए उसे तत्काल जिला अस्पताल इलाज के लिए भेजा जाता है.
हर हर महादेव! 🔱
हर हर बम बम! 🙏🚩भोलेनाथ की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।
“बोल बम! हर हर बम बम! जय शिव शंकर! ॐ नमः शिवाय!” 🕉️🔱#HarHarMahadev #BolBam #HarHarBamBam #KanwarYatra #Mahadev #OmNamahShivaya #BholeNath #ShivShambhu #JaiBholenath #Haridwar pic.twitter.com/k4jrpv3yUD— Haridwar Police Uttarakhand (@haridwarpolice) August 5, 2026
एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवीन्द्र सजवाण के मुताबिक कांवड़ मेले में यदि हरकी पैड़ी और उसके आसपास किसी श्रद्धालु की तबियत बिगड़ जाती है तो सड़क मार्ग में भीड़ के बीच उसे अस्पताल ले जाने में कठिनाई होती है. इसलिए पहले श्रद्धालु को घाटों पर लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में प्राथमिक उपचार दिया जाता है. मेडिकल परीक्षण करने पर यदि उसे तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है, तो वाटर एम्बुलेंस के माध्यम से सीधा ओम घाट पर ले जाया जाता है. वहां पर खड़ी एम्बुलेंस उसे चंद मिनटों में जिला अस्पताल पहुंचा देती है.
पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन ने कांवड़ मेले की पुख्ता तैयारी की हैं. गंगा घाटों पर कई जगह वाटर एम्बुलेंस तैनात की गई हैं. सबसे ज्यादा संवेदनशील स्थान कांगड़ा घाट और सीसीआर घाट है. यहां पर गंगा में डूब रहे कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती होती है. चुनौती का बड़ा कारण है गंगा का तेज बहाव और हाईवे तथा आंतरिक मार्गों पर भीड़ है. एक तो कांवड़िए बिना सुरक्षा के गंगा के बीच जाकर स्नान करते हैं, डूबने लगते हैं. इसके साथ ही इमरजेंसी में एम्बुलेंस से भीड़ के बीच जिला अस्पताल ले जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता. आपात स्थिति से निपटने के लिए ही वाटर एम्बुलेंस लगाई गई हैं.
एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवीन्द्र सजवाण ने बताया कांवड़ मेले में कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए वाटर एम्बुलेंस तैनात की गई हैं. जल पुलिस और आपदा मित्र, एसडीआरएफ के साथ मिलकर डूबते हुए कांवड़ियों को रेस्क्यू कर रहीं है. अभी तक पच्चीस से तीस कांवड़ियों की जान बचाई जा चुकी है. आने वाले दिनों में भीड़ का दबाव बढ़ेगा. उनकी टीमें 24 घंटे घाटों पर तैनात हैं. कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए बिना किसी चुनौती के ड्यूटी दे रहीं हैं. प्रयास है कि क्विक रिस्पांस टाइम में कांवड़ियों की जान को बचाया जा सके.
