दिल्‍ली-एनसीआर दिल्ली को मिला पहला महिला पुलिस थाना, जांच अधिकारी से सिपाही तक सब महिलाएं
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दिल्ली को मिला पहला महिला पुलिस थाना, जांच अधिकारी से सिपाही तक सब महिलाएं

दिल्ली: राजधानी में महिला सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में दिल्ली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. शुक्रवार को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में एक समर्पित ‘महिला पुलिस थाने’ का उद्घाटन सब्जी मंडी इलाके में किया. इस दौरान उन्होंने पुलिस की महिला सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख पहलों की समीक्षा की और राजधानी में महिला-अनुकूल पुलिसिंग के नए मानदंड स्थापित करने के निर्देश दिए.

उद्घाटन के अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह स्पष्ट विजन है कि ‘नारी शक्ति’ ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है. इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए यह नया महिला पुलिस थाना महिलाओं को एक ऐसा सुरक्षित और सहयोगी वातावरण प्रदान करेगा, जहां वे बिना किसी डर या संकोच के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगी और न्याय की मांग कर सकेंगी. यह संस्थान महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक ‘नोडल सेंटर’ के रूप में काम करेगा.’पिंक बूथ’ और ‘सशक्त’ अभियान पर जोरउपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘पिंक बूथ’ और ‘सशक्त’ अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि जमीन स्तर पर इनकी प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने पुलिस बल को स्पष्ट निर्देश दिए कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में ऐसे और भी महिला पुलिस थाने स्थापित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं सुरक्षा तंत्र से सीधे जुड़ सकें.

उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में जोर दिया कि एक सुरक्षित और सशक्त महिला ही प्रगतिशील समाज की वास्तविक नींव है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य एक ऐसा समावेशी और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है, जहाँ हर महिला खुद को सम्मानित और सुरक्षित महसूस करे. उपराज्यपाल ने पुलिस बल से ‘रिस्पॉन्सिव’ (संवेदनशील) लॉ एनफोर्समेंट को अपनी कार्यप्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया. इस कार्यक्रम के माध्यम से दिल्ली सरकार और पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है. आने वाले समय में राजधानी में ऐसे महिला-केंद्रित सुरक्षा ढांचों का विस्तार होने से महिला अपराधों पर अंकुश लगने की उम्मीद है.

इस अवसर पर जोन-1 के विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) देवेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भविष्य में इस मॉडल को धीरे-धीरे दिल्ली के सभी जिलों में लागू किया जाएगा. उन्‍होंने बताया कि यह महिला पुलिस थाना महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी अपराधों से संबंधित मामलों की जांच और कार्रवाई करेगा. हालांकि, स्थानीय थानों की जिम्मेदारियों में कोई कमी नहीं आएगी और वे अपने नियमित कार्य करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि इस सुविधा में पूछताछ और जांच के लिए दो अलग-अलग भवन बनाए गए हैं. जैसे-जैसे मामलों की संख्या बढ़ेगी, उसी के अनुरूप अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यभार का दबाव न बढ़े.

विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्रत्येक जिले में इसी प्रकार के महिला पुलिस थाने स्थापित किए जाएंगे. इस थाने की पहली स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) लक्ष्मी सिंह होंगी, जबकि महिलाओं के खिलाफ अपराध शाखा की एसीपी जमुना थापा की भी यहां तैनाती की जाएगी. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महिलाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाएं आसानी से पुलिस से संपर्क कर सकें.

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