दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत के वास्तविक जीडीपी विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है. केंद्रीय बैंक का यह नया अनुमान उसकी पिछली बैठक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
तिमाही आधार पर विकास का अनुमान
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए तिमाही आधार पर भी जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े साझा किए हैं:
- पहली तिमाही (Q1): 7.0 प्रतिशत
- दूसरी तिमाही (Q2): 6.4 प्रतिशत
- तीसरी तिमाही (Q3): 6.5 प्रतिशत
- चौथी तिमाही (Q4): 6.8 प्रतिशत
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुख्य नीतिगत दर यानी ‘रेपो रेट’ को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा है. इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. बैंक ने बाजार की स्थिति को देखते हुए अपना ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) रुख कायम रखा है.
RBI Governor Sanjay Malhotra says, India's FY27 real GDP growth projected at 6.7%, 10 basis points higher than our previous projection." pic.twitter.com/VBoZ2XyhNH
— ANI (@ANI) August 5, 2026
गवर्नर के अनुसार, अमेरिका द्वारा नए टैरिफ लगाने से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता है. पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इन सभी बाहरी दबावों के बाद भी भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है. देश के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र, अच्छे मानसून और ग्रामीण मांग में तेजी ने आर्थिक विकास को बड़ा सहारा दिया है.
गवर्नर मल्होत्रा ने यह भी बताया कि देश में महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित करने के प्रयास सफल हो रहे हैं. इसी वजह से आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने मुद्रास्फीति (महंगाई) के अनुमान को घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया है. हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि कुछ क्षेत्रों में शुरुआती तनाव अभी भी बना हुआ है, इसलिए केंद्रीय बैंक विकास को गति देने के साथ-साथ कीमतों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा.
