गाजियाबाद: दिव्यांगों के सामने रोजगार हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है. गाजियाबाद में इन दिनों कभी रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने वाले दिव्यांग आज अपनी मोटराइज्ड ट्राई साइकिल पर सजी छोटी सी दुकान के साथ सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई यात्रा शुरू कर चुके हैं. उनके चेहरे पर मुस्कान और आंखों में भविष्य के सपने इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन गंभीरता के साथ पहल करता है तो योजनाएं केवल कार्यों तक सीमित नहीं रहती बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लेकर आती है.
गाजियाबाद में मिशन समर्थ के तहत जिलाधिकारी की पहल ने दिव्यांगों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है. मोटराइज्ड ट्राई साइकिलों को चलती फिरती दुकानों में बदलकर दिव्यांगों को न केवल स्वरोजगार का साधन दिया गया है बल्कि उन्हें यह विश्वास भी मिला है कि अब वह किसी पर बोझ नहीं है. और अब वे मजबूती के साथ अपने परिवार को संभाल सकते हैं. जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 48 दिव्यागों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल पर बनाई गई चलती फिरती दुकान (मोबाइल शॉप) वितरित की गई है.
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजीत पाल त्यागी, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ और मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरव ने संयुक्त रूप से रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और लाभार्थियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि जिला प्रशासन का प्रयास दिव्यांगों को केवल सहायता प्रदान करना नहीं बल्कि उन्हें स्थाई स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका के माध्यम से जोड़ना है. ये पहल दिव्यांगो को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में कारगर साबित होगी.
दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने बताया कि मार्च में 106 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल वितरित किए गए थे. इसी क्रम में प्रथम चरण में लगभग 50 दिव्यांगों को ट्राई साइकिलों पर विशेष सेटअप तैयार कर उन्हें चलती फिरती दुकानों के रूप में विकसित किया गया है और प्रारंभिक विक्रय सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है. इस परियोजना के लिए मोहन मीकिन लिमिटेड मोहन नगर द्वारा कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत 5 लाख रुपए की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी. प्रत्येक दुकान को तैयार करने में लगभग दस हजार की लागत आई है. जिसमें 5300 ट्राई साइकिल के विशेष ढांचे और लगभग 4500 रुपये का मूल्य की प्रारंभिक विक्रेता सामग्री पर खर्च किए गए हैं.
नींव शक्ति संस्था की संस्थापक ऋचा वल्लभ खुल्बाई ने बताया, जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में संस्था द्वारा लाभार्थियों का चयन, वेंडरों के साथ समन्वय, ट्राइसाइकिलों का अनुकूलन (कस्टमाइजेशन) और स्वरोजगार के लिए उन्हें पूर्ण रूप से तैयार करने का कार्य कराया गया. उन्होंने कहा कि मिशन समर्थ को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने में संस्था की पूरी टीम ने सक्रिय योगदान दिया. साथ ही इंग्राहम इंग्लिश मीडियम स्कूल के लगभग 20 छात्र-छात्राओं ने स्वयंसेवक के रूप में परियोजना के विभिन्न कार्यों में सहयोग प्रदान कर सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया.
लाभार्थी दिव्यांग सावित्री ने बताया, उम्र 50 का पड़ाव पार कर चुकी है. ऐसे में शरीर में अब कोई काम करने के लिए ताकत नहीं बची है. दोनों पैरों में पोलियो है पहले से परिवार पर बोझ हूं. मोटराइज्ड ट्राईसाईकिल मिली है तो अब दो पैसे खुद कमा सकूंगी, परिवार को थोड़ा सहयोग कर सकूंगी.