उत्तर प्रदेश साहित्य की मशाल के साथ एक नई शुरुआत : “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” का शुभारंभ
उत्तर प्रदेश

साहित्य की मशाल के साथ एक नई शुरुआत : “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” का शुभारंभ

सुशील कुमार शर्मा

गाजियाबाद: गुरूग्राम में ट्यूलिप फाउंडेशन की इकाई “धर्म फॉर लाइफ” द्वारा “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” के शुभारंभ के अवसर पर कल एक गरिमामय साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य विषय था — “साहित्य : धर्म का मर्म, चेतना और परिवर्तन”. इस आयोजन में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के विभिन्न आयामों पर सार्थक संवाद हुआ.

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकारों, चिंतकों एवं साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की. वक्ताओं ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानते हुए उसे समाज में संवेदना, नैतिकता और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बताया. वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने अपने वक्तव्य में कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवीयता, करुणा और नैतिक चेतना में निहित है तथा साहित्य इन्हीं मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम है. विख्यात लेखक नरेंद्र नागदेव ने साहित्य को समाज का दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह समय की पीड़ा, संघर्ष और आशाओं को स्वर देता है.

वरिष्ठ लेखिका वंदना यादव ने स्त्री चेतना और साहित्य के संबंधों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य समाज के उन पक्षों को सामने लाता है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान नहीं मिलता. वहीं पॉडकास्टर एवं लेखिका पारुल सिंह ने भारतीय साहित्य को सांस्कृतिक निरंतरता और लोकमंगल की परंपरा से जुड़ा हुआ बताया. पूरे संवाद का संचालन डॉ. मेधावी जैन (संस्थापिका, धर्म फॉर लाइफ) ने प्रभावशाली एवं संतुलित ढंग से किया. उन्होंने विषय की गंभीरता को बनाए रखते हुए संवाद को सार्थक दिशा प्रदान की। कार्यक्रम की संकल्पना एवं आयोजन में साहित्यकार किरण यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने बताया कि “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समाज के केंद्र में स्थापित करना है.

समापन अवसर पर रीता जैन (अध्यक्षा, अभिव्यक्ति) ने इस पहल को साहित्य और समाज के मध्य संवाद स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कार्यक्रम का मंच संचालन विशाल पाण्डेय द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया.

इस अवसर पर देवेन्द्र बहल (संस्थापक, सभ्या प्रकाशन) तथा अशोक गुप्ता (संस्थापक अद्विक पब्लिकेशन) की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही. आयोजन के दौरान बार-बार यह विचार उभरकर सामने आया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज में संवेदना, संवाद . और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है. “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” की यह पहल भविष्य में साहित्यिक एवं वैचारिक चेतना को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है.

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