दिल्‍ली-एनसीआर दिल्ली के ‘बांसेरा’ में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आगाज, गृहमंत्री अमित शाह ने किया शुभारंभ
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दिल्ली के ‘बांसेरा’ में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आगाज, गृहमंत्री अमित शाह ने किया शुभारंभ

दिल्ली: दिल्ली के सराय काले खां स्थित दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के तीसरे अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का ‘बांसेरा’ में शुक्रवार को शानदार आगाज हुआ. इस तीन दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया. इस मौके पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिल रहीं. आज रंग-बिरंगी पतंगों से सजे आसमान ने यमुना तट पर बसे इस पार्क को एक उत्सव के मैदान में बदल दिया.

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने पतंगबाजी को भारत की सदियों पुरानी परंपरा बताया. उन्होंने कहा कि पतंगबाजी केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है. गृहमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम अपनी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ सकते हैं.

अमित शाह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा,”जिस प्रकार दिल्लीवासी अपने हाथों में पतंग की डोर थामे इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं, वह शहर की जीवंतता को दर्शाता है.” शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस महोत्सव की सफलता को देखते हुए अगले वर्ष इसे और भव्य और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाए, ताकि यह वैश्विक पटल पर दिल्ली की एक विशिष्ट पहचान बन सके.

इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल होने वाले प्रोफेशनल काइटिस्ट हैं. आसमान में विशालकाय समुद्री जीवों और तिरंगे के आकार की पतंगें आकर्षण का केंद्र रहीं. डीडीए द्वारा विकसित ‘बांसेरा’ में आयोजित पतंग महोत्सव ने पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को एक नया मंच प्रदान किया है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कार्यक्रम के दौरान यह विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और जनता के सम्मिलित प्रयासों से आने वाले वर्षों में इस पतंग महोत्सव की भव्यता और बढ़ेगी. इसे अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर पर एक अनिवार्य आयोजन के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश-विदेश में इसकी ख्याति और बढ़ेगी.

बता दें कि अगले दो दिनों तक चलने वाले इस पंतग महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, फूड स्टॉल्स और पतंगबाजी की प्रतियोगिताओं का आनंद लिया जा सकेगा. पतंग उत्सव मनाने के पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक कारणों का एक सुंदर संगम होता है. यह ऋतु परिवर्तन और प्रकृति का स्वागत करने का भी एक तरीका है. भारत में पतंग उत्सव मुख्य रूप से मकर संक्रांति के समय मनाया जाता है. यह सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है. पतंग उड़ाना इस बात का संकेत है कि अब दिन लंबे होने लगे हैं और फसल काटने का समय आ गया है. यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है.

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, कड़ाके की ठंड के बाद धूप में समय बिताना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. पतंग उड़ाने के बहाने लोग घंटों धूप में रहते हैं, जिससे शरीर को विटामिन D मिलता है. यह त्वचा और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है. पतंगबाजी भारत की सदियों पुरानी परंपरा है. इसे मनाने का एक बड़ा मकसद अपनी सांस्कृतिक जड़ों को जीवित रखना है. यह उत्सव नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ता है और कला को बढ़ावा देता है.

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