दिल्‍ली-एनसीआर ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों पर उठे सवाल, सोसायटी हादसों के बाद स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग तेज
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ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों पर उठे सवाल, सोसायटी हादसों के बाद स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग तेज

ग्रेटर नोएडा: वेस्ट की एक सोसाइटी में शनिवार रात प्लास्टर गिरने से हुई युवक की दर्दनाक मौत ने शहर की हाईराइज सोसाइटियों की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना के बाद लाखों फ्लैट खरीदारों और निवासियों में भय और चिंता का माहौल है. निवासी संगठनों ने सभी पुरानी और नई सोसाइटियों का तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग उठाई है.

ग्रेटर नोएडा और नोएडा क्षेत्र में 200 से अधिक बिल्डर सोसाइटियां हैं, जिनमें लाखों लोग निवास करते हैं. इसके बावजूद अब तक किसी भी सोसाइटी का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं कराया गया है. प्राधिकरण के पास हर महीने प्लास्टर झड़ने, दीवारों में दरार आने और निर्माण संबंधी खामियों की 20 से 25 शिकायतें पहुंच रही हैं.

निवासियों का आरोप है कि कई सोसाइटियों में निर्माण के दौरान हल्की सीमेंट ईंटों और निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया. पंचशील ग्रीन्स, अजनारा होम्स, गौर सिटी-1, गौर सिटी-2, विक्ट्री वन, इरोस संपूर्णम, पंचशील हाईनिश, सुपरटेक इको विलेज-1, 2 और 3 तथा निराला एस्टेट जैसी कई सोसाइटियों में समय-समय पर प्लास्टर टूटकर गिरने और दीवारों में दरार आने की शिकायतें सामने आती रही हैं.

इरोस सम्पूर्णम सोसाइटी के निवासीओ के अनुसार, टावरों की बाहरी दीवारों, बालकनियों और कॉमन एरिया से अक्सर प्लास्टर टूटकर नीचे गिरता रहता है, इस सोसायटी के बने नये फेस का अभी से ही बुरा हाल होना शुरू हो चुका है. जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. इरोस सम्पूर्णम सोसाइटी में पार्किंग, बेसमेंट और टावरों की बाहरी दीवारों में सीपेज और कंक्रीट उखड़ने की समस्याएं काफी समय से जस की तस बनीं बनी हुई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी इमारत की उम्र बढ़ने के साथ नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट आवश्यक होता है. इससे कमजोर हिस्सों की पहचान कर समय रहते मरम्मत की जा सकती है. मुंबई, पुणे और अन्य महानगरों में पुराने भवनों के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है, जबकि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अभी तक ऐसा कोई व्यापक तंत्र विकसित नहीं किया गया है.

निवासी कल्याण संघों RWA/AOA ने मांग की है कि 10 वर्ष या उससे अधिक पुरानी सभी हाईराइज इमारतों का स्वतंत्र एजेंसियों से ऑडिट कराया जाए. साथ ही दोषपूर्ण निर्माण पाए जाने पर बिल्डरों की जवाबदेही तय की जाए.

सोसाइटीज में हों रहीं घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहर की ऊंची इमारतें वास्तव में सुरक्षित हैं. जब तक व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक लाखों निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी.

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