सुशील कुमार शर्मा
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद एवं वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में प्रवासी भारतीय लेखकों से साहित्यिक “संवाद कार्यक्रम” का आयोजन शनिवार, 7 फरवरी 2026 को साहित्य अकादमी के रवीन्द्र भवन सभागार , मंडी हाउस, नई दिल्ली में किया गया. कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं हिंदी सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही. कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था और कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जीतेन्द्र वीर कालरा ने वैश्विक हिंदी परिवार के कार्यों और उद्देश्यों से श्रोताओं को अवगत कराया. स्वागत उद्बोधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के निदेशक श्री नारायण कुमार ने हिंदी के वैश्विक विस्तार में प्रवासी लेखकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्यकारों का सृजन हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है.

वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल जोशी ने दोनों साहित्यकारों कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “दोनों साहित्यकारों ने विदेश में जाकर अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा को आगे बढाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.” कनाडा की प्रख्यात प्रवासी लेखिका डॉ. शैलजा सक्सेना ने प्रवासी साहित्य के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए अपने साहित्यिक कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने “लेबनान की एक रात” सहित अपनी कहानियों और कविताओं का पाठ किया. उन्होंने बताया कि हिंदी राइटर गिल्ड को 18 वर्ष पूरे हो चुके हैं तथा प्रवासी लेखकों द्वारा निरंतर साहित्य सृजन किया जा रहा है. ब्रिटेन से आए सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. अजय त्रिपाठी ने अपनी चर्चित कविताओं और ग़ज़लों का पाठ किया, जिनमें “मैं अपने नाम से डरने लगा हूँ”, “सोच समझ कर बोलो तुम अल्फ़ाज़ यहाँ” और “है दुनिया की रानी दिल्ली” सहित अनेक रचनाएँ शामिल रहीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा. दोनों साहित्यकारों से प्रश्नोत्तर सत्र के बाद मुख्य अतिथि, साहित्य अकादमी के संपादक (हिंदी) श्री कुमार अनुपम ने कहा कि “प्रवासी लेखक भारत से गए नहीं, बल्कि भारत को अपने साथ लेकर गए हैं. संस्थागत प्रयासों से हिंदी को वैश्विक विस्तार मिला है.”
सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री नरेश शांडिल्य ने साहित्य की सामाजिक आवश्यकता पर बल देते हुए वैश्विक हिंदी परिवार की निरंतर प्रगति की सराहना की तथा डॉ. अजय त्रिपाठी के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया. लेखिका डॉ. अलका सिन्हा ने अक्षरम के संदर्भ में चर्चा करते हुए डॉ. अजय त्रिपाठी की कविताओं एवं ग़ज़लों तथा डॉ. शैलजा सक्सेना की रचनात्मक यात्रा पर प्रकाश डाला. कवयित्री एवं शिक्षाविद डॉ. अनीता वर्मा ने वैश्विक हिंदी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शैलजा सक्सेना के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने वैश्विक हिंदी डॉट कॉम पर उनकी रचनात्मक सक्रियता का उल्लेख करते हुए अपनी चर्चित कविता *“तमकमा उठती है”* का पाठ किया।कार्यक्रम का संचालान वैश्विक हिंदी परिवार, दिल्ली के अध्यक्ष श्री ऋषि कुमार शर्मा ने किया और कार्यक्रम का संयोजन मनोज कुमार श्रीवास्तव ‘आनाम’ और डॉ. शिवम शर्मा द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ.
इस अवसर पर सुश्री सुनीता पाहुजा, संयुक्त निदेशक प्रौद्योगिकी मंत्रालय, श्री शिव कुमार निगम, शुभांगी, डॉ. सुशील द्विवेदी, संजना कुमारी, रंगकर्मी अजय मनचंदा,राजाराम यादव, ममता वालिया, शोधार्थी अमित कुमार, प्रो.प्रमिला, डॉ. सुमित कुमार मीणा,डॉ. नीलम वर्मा,डॉ. श्रीनिवास त्यागी, डॉ. संतोष भारद्वाज,नवीन कुमार ,मनीष कुमार, प्रखर शर्मा, उमा शर्मा, जैसे विद्वानों की उपस्थिति रही.