सुशील कुमार शर्मा
नई दिल्ली: दिनांक 24 अगस्त 2026 को जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज, भारतीय भाषा समिति, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम केंद्र तथा वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में ब्रिटेन से आए हिंदी-अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच हिंदी, भारतीय संस्कृति, शिक्षा तथा भाषा के वैश्विक स्वरूप को लेकर संवाद स्थापित करना था.
कार्यक्रम का शुभारंभ जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की प्रार्थना एवं कुलगीत से हुआ. इसके पश्चात कॉलेज की प्राचार्या प्रो. स्वाति पाल ने अपने वक्तव्य में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की स्थापना की पृष्ठभूमि और विशेषताओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह कॉलेज छात्राओं को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था. उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा, कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं रैंकिंग तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की.

प्रो. संध्या गर्ग, संयोजक, भारतीय भाषा समिति ने अपने संबोधन में राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आधुनिक परिवेश में रहते हुए भी हमें अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए. अपनी मूल संस्कृति से जुड़े रहना व्यक्ति के व्यक्तित्व को समृद्ध करता है.
प्रो. वी. राज्यलक्ष्मी, संयोजक, अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कार्यक्रम केंद्र ने जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉलेज की संभावित भूमिका और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की चर्चा की.
कार्यक्रम संयोजक डॉ. विवेक शर्मा ने ब्रिटेन में हिंदी के विकास, उसकी संभावनाओं और सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे. उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई जाने वाली विभिन्न भाषाओं का उल्लेख करते हुए भाषा-अध्ययन के व्यापक अवसरों की जानकारी दी और हिंदी को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. इस अवसर पर अनिल शर्मा जोशी, अध्यक्ष, वैश्विक हिंदी परिवार एवं संस्था के प्रेरणास्रोत के मार्गदर्शन और प्रेरणा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया. उनके निरंतर प्रोत्साहन, हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के प्रति प्रतिबद्धता तथा भारत और विदेशों में हिंदी से जुड़े विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्थाओं को एक मंच पर लाने के प्रयासों से ऐसे अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रमों को नई दिशा और गति मिल रही है.
ऋषि कुमार शर्मा, अध्यक्ष, वैश्विक हिंदी परिवार, दिल्ली इकाई ने हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संवेदनाओं से जुड़ी हुई है. उन्होंने विद्यार्थियों से भाषा संबंधी झिझक और बाधाओं को दूर कर हिंदी के विकास में योगदान देने का आग्रह किया तथा भविष्य की योजनाओं को मिलकर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
ब्रिटेन से आई सुरेखा चौफला, अध्यक्ष यूके समिति ने ब्रिटेन में हिंदी के अध्ययन एवं विकास की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में विद्यार्थियों को हिंदी सीखने के लिए किस प्रकार अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न स्तरों पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. उन्होंने नई पीढ़ी के बच्चों को हिंदी से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
ब्रिटेन से आए हिंदी प्रो. श्री हरीश पोपटानी ने भाषा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व के साथ-साथ ब्रिटेन की जीवनशैली और वहां की सामाजिक सांस्कृतिक परिस्थितियों पर भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया.
कार्यक्रम में जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज के विद्यार्थियों और ब्रिटेन से आए विद्यार्थियों के बीच जीवंत संवाद हुआ. विद्यार्थियों ने शिक्षा, हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति, ब्रिटेन की जीवनशैली तथा दोनों देशों के शैक्षणिक अनुभवों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए. इस संवाद ने विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति और भाषा को समझने का अवसर प्रदान किया.
कार्यक्रम के दौरान जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की वेबसाइट एवं संस्थान की गतिविधियों पर आधारित प्रस्तुति भी दी गई. डॉ. कुश कुमार गयासेन ने विद्यार्थियों को आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया. कार्यक्रम में विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों को जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिवानी बर्नवाल, IQAC की ओर से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया. वैश्विक हिंदी परिवार की ओर से सुमित मीणा, सहायक आचार्य हिंदी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय, मनीष कुमार एवं अजय शर्मा ने कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाई.