दिल्‍ली-एनसीआर सरकारी स्कूलों की बदहाली पर CJP ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर मांगा जवाब
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सरकारी स्कूलों की बदहाली पर CJP ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर मांगा जवाब

दिल्ली: सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक एवं संयोजक अभिजीत दिपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर स्कूलों की स्थिति पर सार्वजनिक जानकारी देने की मांग की है. पत्र में उन्होंने कहा है कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को पीने का साफ पानी, कार्यशील शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

पत्र में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं. ऐसे हालात में बच्चों को शिक्षा हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. CJP ने सवाल उठाया कि जब बच्चों को शिक्षा के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं तो देश के विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है. अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्रियों से पूछा है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण किया गया और वर्तमान में कितने स्कूलों को मरम्मत या पूरी तरह से पुनर्निर्माण की जरूरत है. उन्होंने स्कूलों के बुनियादी ढांचे की मौजूदा स्थिति को सार्वजनिक करने की मांग की है.

पत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की स्थिति पर भी जानकारी मांगी गई है. CJP ने पूछा है कि वर्तमान में कितने शिक्षण पद स्वीकृत हैं, इनमें से कितने पदों पर नियुक्तियां हैं और कितने पद अभी खाली पड़े हैं. संगठन का कहना है कि शिक्षकों की उपलब्धता सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी है.

CJP ने पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए आवंटित बजट और उसमें से वास्तव में खर्च की गई राशि की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है. इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य में और कितने सरकारी स्कूलों की जरूरत है.

पत्र में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा दिए जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी मांगी गई है. संगठन ने जानना चाहा है कि शिक्षकों को किन-किन गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है और इसका उनकी शिक्षण व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है.

CJP ने राज्यों से यह भी बताने को कहा है कि कितने सरकारी स्कूलों में पर्याप्त कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सुविधाएं हैं. इसके अलावा साफ और कार्यशील शौचालयों तथा बच्चों के लिए उचित खेल सुविधाओं और खेल उपकरणों का भी आंकड़ा मांगा गया है. पत्र में अभिजीत दिपके ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल या सरकार से जुड़ा नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य से संबंधित है. उनका कहना है कि हर बच्चे को सुरक्षित कक्षा, स्वच्छ पेयजल, कार्यशील शौचालय, बैठने के लिए बेंच और पढ़ाने के लिए शिक्षक मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में पैदा हुआ हो या उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो. CJP ने शिक्षा मंत्रियों से इन जानकारियों को सार्वजनिक करने और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है.

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