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डीएवी स्कूल गांधी नगर में धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा गुरु शिष्य परंपरा का व्यास पूजा उत्सव - TV News Today
दिल्‍ली-एनसीआर डीएवी स्कूल गांधी नगर में धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा गुरु शिष्य परंपरा का व्यास पूजा उत्सव
दिल्‍ली-एनसीआर

डीएवी स्कूल गांधी नगर में धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा गुरु शिष्य परंपरा का व्यास पूजा उत्सव

दिल्ली: डीएवी स्कूल गांधी नगर में आज दिनांक 10 जुलाई 2025 गुरुवार को गुरु पूर्णिमा गुरु शिष्य परंपरा का उत्सव बड़े धूमधाम से विद्यालय प्रांगण में मनाया गया. जिसमें गणमान्य लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जिसमें विद्यालय के अध्यक्ष श्री नरेश शर्मा जी ,विद्यालय प्रबंधक श्री गिरिजेश रस्तोगी जी विद्यालय प्रमुख श्री लखीराम जी उप प्रमुख ओम प्रकाश यादव जी विद्यालय परीक्षा विभाग प्रमुख श्रीमान दिनेश शर्मा जी गणित प्राचार्य एवं एवं आज के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख श्री सतीश शर्मा जी श्रीमती उर्वशी तोमर श्रीमती रेणु जोशी श्रीमती तनुजा कसाना ग्रंथपाल श्री आलोक जी, श्री आलोक भारत जी उपस्थित रहे तथा विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता आशुतोष जी द्वारा मंच संचालन किया गया सर्वप्रथम “गुरू पूर्णिमा:गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः” श्लोक से तथा दीप प्रज्जवलन द्वारा सभा का शुभारंभ किया गया “गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष.

इस दोहे में कबीरदास ने आम लोगों से कहा है कि गुरु के बिना ज्ञान का मिलना असंभव है. जब तक गुरु की कृपा प्राप्त नहीं होती, तब तक कोई भी मनुष्य अज्ञान रूपी अधंकार में भटकता हुआ माया मोह के बंधनों में बंधा रहता है, उसे मोक्ष (मोष) नहीं मिलता. गुरु के बिना उसे सत्य और असत्य के भेद का पता नहीं चलता, उचित और अनुचित का ज्ञान नहीं होता. वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास की जन्मोत्सव के उपलक्ष में विद्यालय में मुख्य अतिथि वैभव मीना जी का आगमन हुआ ‘वैभव मीना,जी मूलत: गांव-टोडूपुरा, हिण्डौन सिटी करौली, राजस्थान के निवासी हैं.

आप जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ में संयुक्त सचिव हैं. आप कावेरी छात्रावास, जेएनयू के अध्यक्ष भी हैं. आप JNU के भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी साहित्य विषय में तृतीय वर्ष के शोधार्थी हैं. आपने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की पढ़ाई की है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से इन्होंने हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है. आपका अभाविप से परिचय 2018 से है. पूर्व में आपने भाग संयोजक,जयपुर महानगर प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, अभाविप जयपुर प्रांत,इकाई उपाध्यक्ष, अभाविप बीएचयू, जनजातीय कार्य सह-संयोजक, अभाविप काशी प्रांत, इकाई उपाध्यक्ष, अभाविप SLL&CS जेएनयू दायित्वों का निर्वहन किया है.

वर्तमान में आपका JNU इकाई में सहमंत्री का दायित्व है. जिन्होंने आज हमारे छात्रों को गुरु के महत्व के बारे में बताया और वैभव जी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बारे में छात्रों से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की उन्होंने अपने किए गए कार्यों के बारे में सभी छात्रों को बताया किस प्रकार वामपंथी दलों के द्वारा देश में देशद्रोही गतिविधियों से उन्होंने जेएनयू को बचाया उसके विषय में छात्रों को बताया अपने गुरु शिष्य परंपरा के बारे में छात्रों को बताया तथा एबीवीपी से जुड़ने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित किया. इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक गृजेश रस्तोगी जी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारी दी जिनका जन्म 6 जुलाई 1901 में हुआ और धारा 370 हटाने के लिए जिन्होंने भरसक प्रयास किए एक राजनीतिज्ञ, बैरिस्टर और देशभक्ति के रूप में उन्होंने अपना योगदान देश को दियाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता से उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की. उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज (बी.ए., एम.ए., एल.एल.बी., डी.लिट.) से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. वे 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे. 1953 में जब उन्होंने राज्य की सीमा पार करने का प्रयास किया तो उन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:

कलकत्ता में जन्मे मुखर्जी एक शैक्षणिक परिवार से थे। उनके पिता, आशुतोष मुखर्जी, एक न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद थे। उन्होंने अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में बीए (ऑनर्स), बंगाली में एमए और बीएल (विधि स्नातक) की उपाधि प्राप्त की.
राजनीतिक कैरियर:
प्रारंभिक राजनीतिक भागीदारी:
मुखर्जी ने अपना राजनीतिक जीवन हिंदू राष्ट्रवादी संगठन हिंदू महासभा से शुरू किया.
मंत्री की भूमिका:
उन्होंने भारत के प्रथम आपूर्ति एवं उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया.
हिंदू महासभा के साथ मतभेद:

महात्मा गांधी की हत्या के बाद मुखर्जी के हिंदू महासभा के साथ मतभेद होने लगे, खासकर तब जब उस पर हत्या के लिए माहौल बनाने का आरोप लगाया गया. उन्होंने संगठन को अपनी राजनीतिक गतिविधियां स्थगित करने का सुझाव दिया.
भारतीय जनसंघ की स्थापना: 1951 में मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ नामक एक राजनीतिक दल की स्थापना की जिसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रवाद और हिंदू हितों को बढ़ावा देना था.
संसदीय कैरियर: वह भारतीय जनसंघ के पहले अध्यक्ष बने और 1952 के चुनावों में भारतीय संसद में भी सीट जीती.
अन्य उल्लेखनीय योगदान:
जम्मू और कश्मीर के लिए वकालत: मुखर्जी जम्मू और कश्मीर के शेष भारत के साथ एकीकरण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को दिए गए विशेष दर्जे का विरोध किया.

विद्यालय के गणित आचार्य आज के मुख्य वक्ता राष्टीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख श्रीमान सतीश शर्मा जी द्वारा छात्रों को ABVP, देशभक्ति और गुरु में निष्ठा रखने के लिए प्रेरित किया गया तथा छात्रों को कहानी सुना कर गुरु के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने और विश्वास रखने का संदेश दिया. श्री राघवेंद्र जी अतिथि जी द्वारा एबीवीपी के 77 वर्ष पूर्ण होने वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के स्थापना दिवस 9 जुलाई 1949 के बारे में छात्रों को बताया गया विद्यार्थियों को एबीवीपी की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा दी गई तथा अपने कार्यों से अवगत कराया गया विद्यालय प्रबंधक श्री नरेश शर्मा जी द्वारा छात्रों को देशभक्ति गुरु भक्ति मातृ भक्त के प्रति जागरूक किया गया छात्रों को देशभक्ति के बारे में बात कर उनकी कीर्ति को सुना कर छात्रों में देशभक्ति जागृत करने का प्रयास किया गया छात्र को राष्ट्र निर्माता बताते हुए उन्होंने बिरसा मुंडा विवेकानंद जी के विषय में भी जानकारी दी.

आज कार्यक्रम में ABVP के संगठन मंत्री मनीष जी विद्यालय के पूर्व छात्र महेंद्र अग्रवाल जी जी राष्टीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी विभाग पर्यावरण संयोजक हैं उनकी भी गरिमा मय उपस्थिति रही. तत्पश्चात विद्यालय के प्रमुख श्रीमान लखीराम जी द्वारा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया तथा छात्रों को देशभक्त बनने, तथा मोदी जी के बारे में भी छात्रों को जानकारी दी किस प्रकार टेक्नोलॉजी का देश में प्रचार हो रहा है उसके विषय में छात्रों को बताया गया इसी के साथ शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया

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