दिल्ली: आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक रूप से कमजोर आरक्षित वर्ग के छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए शुरू की गई “जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” में वित्तीय अनियमितता होने की बात सामने आई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा (ACB) से कराने की एलजी से सिफारिश की थी. अब ACB को जांच के आदेश दिए गये है.
इसी मुद्दे पर दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दलित छात्रों की मदद के नाम पर चलाई गई योजना में कोचिंग माफिया से मिलकर 145 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया, जबकि पूरी योजना का प्रावधान महज 15 करोड़ रुपये का था. अब एलजी ने इस मामले की जांच ACB को सौंप दी है. वर्ष 2020-21 में ‘आप’ सरकार द्वारा चलाई जा रही “जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं.
‘आप’ सरकार द्वारा चलाई जा रही “जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” में वर्ष 2021-22 में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। इस योजना का बजट सिर्फ ₹15 करोड़ था, लेकिन ‘आप’ सरकार ने लगभग ₹145 करोड़ के फर्ज़ी बिलों वाली फाइलों को आगे बढ़ा दिया।
आम आदमी पार्टी ने दलितों…
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) July 16, 2025
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि “जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” का बजट सिर्फ 15 करोड़ था, लेकिन आप सरकार ने 145 करोड़ से ज़्यादा के फर्ज़ी बिलों वाली फाइलों को आगे बढ़ा दिया. आम आदमी पार्टी ने दलितों के नाम पर सत्ता हथिया कर दलित बच्चों के भविष्य को लूटा है. इन्होंने बाबासाहेब के आदर्शों का अपमान किया है.
बता दें कि पूर्व की आप सरकार द्वारा शुरू की गई जय भीम योजना (एससी) का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग के अवसर प्रदान करना था. आंकड़ों के अनुसार, पिछली आप सरकार ने बजटीय आवंटन का बहुत कम उपयोग किया. दिल्ली विधानसभा के आंकड़ें अल्पसंख्यकों, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्गों की सहायता के लिए जय भीम योजना के गैर-एससी घटक के साथ समान पाठ्यक्रम दिखाते हैं. तत्कालीन सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में इसके लिए 70 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, 42 करोड़ रुपए संशोधित अनुमान था और केवल 4 करोड़ रुपये खर्च किए गए. अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 में 90 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिन्हें संशोधित कर 12 करोड़ रुपये कर दिया गया और खर्च एक रुपया भी नहीं हुआ. वित्तीय वर्ष, 2023-2024 में 30 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जिसे संशोधित कर 4 करोड़ रुपए कर दिया गया.
वहीं इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में एससी व एसटी, ओबीसी, EWS, अल्पसंख्यक छात्रों को यूपीएससी, एसएससी, डीएसएसएसबी, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए शुरू हुई इस योजना में पूर्ववर्ती सरकार ने भ्रष्टाचार किया है.
मंत्री आशीष सूद के अनुसार यह योजना वर्ष 2018 में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा शुरू की गई थी. योजना का उद्देश्य एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, अल्पसंख्यक छात्रों को प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग मुहैया कराना था, जिसकी राशि दिल्ली सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानों को दी जानी थी. योजना के तहत वर्ष 2018 में 4900 और 2019 में 2071 छात्रों को कोचिंग देने का प्रस्ताव था. लेकिन कोविड महामारी के दौरान, जब लाखों परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब इन नेताओं ने कोचिंग माफिया के साथ मिलकर भारी घोटाला किया.
आशीष सूद के मुताबिक योजना का प्रारंभिक बजट केवल 15 करोड़ रुपये था, लेकिन 31 जुलाई 2021 से अगस्त 2022 के बीच प्राइवेट कोचिंग संस्थानों ने 145 करोड़ रूपये का बिल भुगतान हेतु प्रस्तुत किया. इन बिलों के संबंध में किसी तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. बाद में AAP सरकार ने इन बिलों के भुगतान के लिए कोचिंग संस्थानों को अदालत भेज दिया. इस प्रकरण की जांच कराई गई, जिसमें सामने आया कि संस्थानों द्वारा 13,000 छात्रों की सूची दी गई, लेकिन मात्र 3,000 छात्रों की पहचान सत्यापित हो सकी. शेष छात्रों की कोई जानकारी या रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं हैं.
योजना के तहत आईएएस कोचिंग की औसत फीस एक लाख रुपये, एमबीए/क्लैट के लिए 50 हजार रुपये, एसएससी/एलआईसी के लिए 30 हजार रुपये, ग्रुप-C के लिए 25 हजार रुपये और इंटरव्यू कोर्स के लिए 10 हजार रुपये देने का प्रावधान है.
