उत्तराखंड: हरिद्वार भारत देश में गुरु शिष्य परंपरा का अनादिकाल से ही चली आ रही है. इसी गुरु शिष्य परंपरा को आज भी भारत देश में साधु-संतों द्वारा लगातार निभाया जा रहा है. जिसके तहत वह अपने जीते जी ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर देते हैं. ये उत्तराधिकारी उनके बाद धर्म के प्रचार प्रसार और उनसे जुड़ी संपत्ति का मालिक होता है.
जिसके लिए साधु संतों द्वारा जब भी अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जाता है, तो खुशी जताते हुए समाज को इसकी जानकारी देने के लिए वह भंडारे का आयोजन करते हैं. सभी साधु-संतों को बुलाते हैं, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के संत का उत्तराधिकारी बनाने का एक अनोखा नजारा देखने को मिला। जब संत ने अस्पताल में ही अपने उत्तराधिकारी को तिलक किया. ये देख हर कोई दंग रह गया. अपनी बीमारी से लड़ाई के बावजूद भी साधु संतों को आने वाले समय में किस तरह धर्म के प्रचार प्रसार और उनसे जुड़ी सभी गतिविधियों की चिंता है, यह वीडियो सब दिखाता है.
इस बारे में जानकारी देते हुए श्री बड़ा उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश ने बताया कि काफी समय से महामंडलेश्वर गोपाल दास की तबीयत खराब चल रही थी. ऐसे में वह अब एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं. इसे देखते हुए उन्होंने अपना उत्तराधिकारी अपने शिष्य महंत अभिषेक दास को नियुक्त किया है. हमारे साधु संतों में परंपरा रही है कि साधु संत जीवित रहते ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकते हैं.
इसी परंपरा को निभाते हुए और धर्म के प्रचार प्रसार में कमी ना रहे, इसीलिए महामंडलेश्वर गोपाल दास द्वारा ऋषिकेश के एम्स में मंगल तिलक कर अपने शिष्य को ही उत्तराधिकारी बनाया गया है. जल्द ही वह ठीक होकर अपने आश्रम में भंडारा भी आयोजित करेंगे. इस दौरान बड़ी संख्या में साधु संत एम्स हॉस्पिटल में ही उपस्थित रहे, जहां पर उत्तराधिकारी महंत अभिषेक दास का मंगल तिलक किया गया.
