उत्तराखंड: भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने आज सोमवार को अपने हिमालय स्थित केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया. सोमवार सुबह पूजा अर्चना के बाद डोली को मंदिर के गर्भ गृह से बाहर सभा मंडप में विराजमान किया. जिसमें हक हकूकधारियों की ओर से भगवान की चल उत्सवह विग्रह डोली का श्रृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर की तीन परिक्रमा कर डोली ने अपने अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान किया.
सोमवार को डोली गुप्तकाशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में रात्रित विश्राम करेगी. इसके बार छह मई को फाटा, सात को गुप्तकाशी और नौ मई को डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी। जबकि 10 मई को भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनाथ के लिए खोले जाएंगे.
जय केदारनाथ| गर्भ गृह से बाहर लाई गई बाबा केदार की डोली, जयकारों के साथ धाम के लिए किया प्रस्थान!#Kedarnath #Ukhimath#Uttarakhand pic.twitter.com/xD6MaCcw8M
— News Today Network (@newstodaynetwo1) May 6, 2024
वहीं इससे पहले रविवार को ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए केदारनाथ के अग्रणी क्षेत्रपाल के रुप में पूजे जाने वाले भगवान भैंरवनाथ की पूजा अर्चना की गई. ऊखीमठ में देर सांय तक चली पूजा अर्चना में भैंरवनाथ की अष्टादश आरती उतारी गई. भैंरवनाथ की विशेष पूजा अर्चना के साथ ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
समुद्र तल से 1311 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद ऊखीमठ में मौजूद ओंकारेश्वर मंदिर को प्रथम केदार भगवान माना जाता है. दूसरे केदार भगवान मध्यमेश्वर का शीतकालीन गद्दीस्थल भी ऊखीमठ में ही है. इसे पंचगद्दी स्थल के नाम से भी जाना जाता है. प्राचीन मान्यताओं की वजह से ही इस जगह को पंचकेदार के मुख्य रावल का गद्दी स्थल माना जाता है.
मान्यता है शीतकाल में जो भक्त बाबा केदार के दर्शन पंचगद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में दर्शन करते हैं, उन्हें भी केदारनाथ धाम में दर्शनों के समान पुण्य प्राप्त होता है. पूरे शीतकाल के दौरान केदारनाथ की तरह यहां भी बाबा केदार की नित्य पूजाएं संपन्न होती हैं.
