उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार सुभाष चंदर की कहानी पर बनी फिल्म ‘रजनी की बारात’ ने मचाई धूम
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गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार सुभाष चंदर की कहानी पर बनी फिल्म ‘रजनी की बारात’ ने मचाई धूम

सुशील कुमार शर्मा

गाजियाबाद: हाल ही में रिलीज हुई फिल्म रजनी की बारात ने इन दिनों खूब धूम मचा रखी है. यह फिल्म गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार देश के जाने- माने व्यंग्यकार व प्रतिष्ठित साहित्यकार सुभाष चंदर की कहानी “रज्जन की दुल्हनिया” पर आधारित है. इस कहानी का विस्तार करते हुए इसका फिल्मी नाम “रजनी की बारात” दिया गया है. फिल्म के पर्दे पर फिल्म के कहानीकार के रुप में सुभाष चंदर नाम ही अंकित किया गया है.

सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने अपनी कहानी ‘रज्जन की दुल्हनिया’ में एक ऐसी साहसिक लड़की को दिखाया है जो सामाजिक रुढ़ियों को तोड़कर अपने प्रेमी से शादी करने खुद बारात लेकर उसके घर पहुंचती है. लेकिन सुभाष चंदर की इस साहसिक व प्रगतिशील विचारधारा वाली मूल कहानी को बिहार के मिथिला क्षेत्र की पृष्ठभूमि के संबंधित सिनेमाई रुप देने के लिए आदित्य अमन व अनुपम पुरोहित ने कॉमेडी फिल्म के लिए कहानी को क्षेत्रीय टच देने के लिए बिहार की स्थानीय भाषा व शब्दावली का प्रयोग किया, जिसे बेहद पसंद किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद निवासी प्रतिष्ठित साहित्यकार सुभाष चंदर की गिनती भारतीय हिन्दी साहित्य के जाने माने लेखकों व व्यंग्यकारों में होती है. वे अब तक 53 पुस्तक लिख चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने टीवी एवं रेडियो के लिए 100 से ऊपर धारावाहिकों का लेखन किया है. केन्द्र सरकार में प्रबंधक हिंदी के तौर पर सेवा दे चुके सुभाष चन्दर सेवानिवृत्ति के बाद अब पूरी तरह लेखन कार्य को समर्पित हैं, हालांकि गत डेढ दशक से वे टाइफैक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार में हिंदी परामर्शदाता के रूप में कार्यरत हैं.

सुभाष चंदर की उल्लेखनीय कृतियों के लिए उ. प्र. सरकार की ओर से पं. श्रीनारायण चतुवेर्दी सम्मान, शरद जोशी सम्मान, शब्द शिल्पी सम्मान, भारतेंदु शिखर सम्मान, शरद जोशी सम्मान, अट्टहास सम्मान, साहित्यगंधा सम्मान ,हरिशंकर परसाई सम्मान, सृजन सम्मान आदि से नवाजा जा चुका है, जबकि भारत सरकार की ओर से इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय पुरस्कार व डा. मेघनाथ साहा पुरस्कार प्रदान किया गया है. इसके साथ ही उन्हें हाल ही में हिंदी अकादमी दिल्ली सम्मान देने की घोषणा की गयी है.

सुभाष चंदर की श्रेष्ठ लेखन के उनकी कृतियों में अक्कड़-बक्कड़ ( उपन्यास ), माफ कीजिये श्रीमान, इंसानियत का शो, आइये स्वर्ग चलते हैं,कल्लू मामा जिंदाबाद , थोड़ा हंस ले यार , बेबी किलर, हद कर दी आपने,तीन आदमी चालीस पत्थर,हंसती हुई कहानियाँ, बजरंगी लल्ला की बारात, सुभाष चंदर की व्यंग्य कथाएँ के कुल 18 संग्रह हैं। उनकी लिखित तमाम रचनाएं कुछ विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम में पढ़ाई जाती हैं.

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