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लखनऊ में उपराष्ट्रपति ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की किताब 'चुनौतियां मुझे पसंद हैं' का किया विमोचन - TV News Today
उत्तर प्रदेश लखनऊ में उपराष्ट्रपति ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की किताब ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का किया विमोचन
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लखनऊ में उपराष्ट्रपति ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की किताब ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का किया विमोचन

उत्तर प्रदेश: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार को लखनऊ पहुंचे. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बक्शी का तालाब स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर उनका स्वागत किया. इसके बाद उपराष्ट्रपति जानकीपुरम स्थित एकेटीयू में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे. यहां उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की आत्मकथा ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुछ देर पहले मुझसे कहा था कि मुझे किताब मुफ्त में नहीं मिलेगी. मैं आपको बता रहा हूं कि राज्यपाल महोदय कि मुझे कोई भी चीज मुफ्त में लेने की आदत नहीं है. आनंदीबेन पटेल ने जिन मजदूरों के लिए जिंदगी भर काम किया उन्हीं के दिन पर पुस्तक विमोचन कराने पर वह साधुवाद की पात्र हैं.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बात यहां तक नहीं रुकती, राज्यपाल ने स्थान कौन सा चुना, अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी. मैं आनंदीबेन पटेल की हर बात को बारीकी से देखना चाहता हूं. आपने टेक्निकल यूनिवर्सिटी चुनी, आप चांसलर बहुत सारे विश्वविद्यालय की हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दुनिया भर में तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आप यह लिख रही हैं कि चुनौतियां मुझे पसंद हैं. मुख्यमंत्री आपको युवा कहा जा सकता है. मुझे अब युवा की परिभाषा समझ नहीं आती. आपसे अधिक उम्र के मुख्यमंत्री भी युवा हैं. आप उत्तर प्रदेश के इकोनॉमी को बिना कोई टैक्स बढ़ाए 30 लाख करोड़ तक ले गए. यह हर अर्थशास्त्री के लिए अचंभा है. यह शोध का विषय है. प्रति व्यक्ति आय में भी अपने दोगुनी छलांग लगाई.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनौती के प्रति निष्क्रिय रहना चुनौती का सामना न करना कायरता की निशानी है. कायरता का कोई अंश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री में नहीं है. इसकी किसी जांच की जरूरत नहीं है. पहलगाम चुनौती पेश करता है. हमारे लिए एश्योरेंस है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. हम भारतीय हैं, भारतीयता हमारी पहचान है. राष्ट्रवाद हमारा धर्म है. हम इससे दूर नहीं जा सकते. पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती वह होती है जो अपनों से मिलती है, जब भी कोई संकट आए गीता और रामायण की ओर ध्यान दो. कर्म करते जाओ फल की इच्छा मत करो. चुनौतियां सामने आएंगी. कुछ अपराध मानव मन पर अंकित हो जाते हैं. उन अपराधों के अपराधियों को कानून के दायरे में रहते हुए सजा देना जरूरी होता है.

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