गाजियाबाद : जिला न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के सुलह योग्य और शमनीय 75951 वादों का निस्तारण किया गया. इसमें अर्थदण्ड से दण्डनीय मामलों में एक करोड़ 62 लाख 78 हजार 818 रूपये अर्थदण्ड आरोपित कर वसूल किया गया. लोक अदालत में पहुंचे पति-पत्नी जो किसी कारणवश अलग हो गए थे आज एक हो गए. लोक अदालत में कुल परिवारों का घर बस गया. कुल 13 जोड़े एक साथ हो हंसी-खुशी अपने घर चले गए.
राष्ट्रीय लोक अदालत में वैवाहिक एवं भरण पोषण सम्बन्धी 193 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय द्वारा सुलह समझौते के आधार पर हुआ. लघु प्रकृति के मामलों में लेबर एक्ट, वाणिज्य अधिनियम, 26 यू०पी०एक्ट, पुलिस अधिनियम, बाट माप अधिनियम, मोटर वाहन अधिनियम, आबकारी अधिनियम, जिला परिषद अधिनियम आदि से सम्बन्धित मामलों का निस्तारण किया गया. मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से सम्बन्धित कुल 73 मामलों का निस्तारण करते हुए पक्षकारान को एक करोड़ 74 लाख 75 हजार 500 रूपये अदा किये जाने के आदेश पारित किये गये.
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों के लोन रिकवरी, बी.एस.एन.एल. से सम्बन्धित कुल 285 मामलों का निस्तारण किया गया. इसमें 3 करोड़ 54 लाख 88 हजार 455 रूपये की धनराशि वसूली के आदेश पारित किये गये. राजस्व न्यायालयों से प्राप्त सूचना के अनुसार राजस्व सम्बन्धी 80154 मामलों का निस्तारण किया गया. जिला न्यायालय गाजियाबाद में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का दौरा विभिन्न लॉ कॉलेज के छात्रों द्वारा भी किया गया और उन्होने राष्ट्रीय लोक अदालत में वाद निस्तारण प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में जानने का प्रयास किया. इस दौरान उन्होने न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और सामान्य जनता आदि के भी अनुभव को जाना और समझा.
जिला जज अनिल कुमार, अपर जिला जज हीरा लाल, अपर जिला जज मुकेश सिंह आदि ने लोक अदालत के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी. जिससे बच्चों ने जाना की लोक अदालत में किन-किन वादो का निस्तारण किया जाता है, साथ ही न्यायपालिका के इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के बारे में भी जानकारी प्रदान की. जिला जज अनिल कुमार ने कहा कि छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए इस तरह के दौरे उपयोगी साबित होंगे. उन्हें लोक अदालत की कार्य प्रणाली और इसके महत्व को समझने में मदद मिलेगी.
