उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन सत्र में कहा कि मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों से ये विश्वविद्यालय ज्ञान की धरा बनी है. उन्होंने विज्ञान भारती के कार्यक्रम आयोजित करने को सभी को बधाई दी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है, दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है उसके पास विज्ञान का यही भाव था. आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है. भारत के प्राचीन गौरवशाली परम्परा को अध्ययन करेंगे, तो ये देखने को मिलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी, चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी पर स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए. हमको ये देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ. पहले किसान केवल किसान नहीं था, वो इनोवेटर था.
उन्होंने कहा कि कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था. उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था. हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वो देश को जोड़ने महत्वपूर्ण कड़ी था. हमारी अर्थव्यवस्था खेती बाड़ी से जुड़े हुए थे, अपने उत्पाद को दुनिया में भेजने का काम करता था. भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है. हमारी सबसे बड़ी ताक़त एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था.
मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु के दो पौधे लगाने वाले कहानी बताई और कहा कि जीव में ही नहीं जंतुओं में भी चेतना होती है. बचपन में उन्होंने अपने माँ के द्वारा पौधे लगाये जाना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ज्ञान जहाँ से भी आये उसका स्वागत होना चाहिए उन्होंने जगदीश चंद्र बसु की लाइंस को भी उल्लेखित किया. भारत व उसकी परंपरा को धिक्कारा गया, जिसके फलस्वरूप सभी सुविधाओं से लैस भारत हो गया.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मां गंगा के प्रति भारत की प्राचीन सनातन आस्था है. कोई कार्य ऐसा नहीं है जिसमें विज्ञान नहीं हो. उन्होंने ऑर्गेनिक खेती तथा जीरो बजट खेती की बात करते हुए भी रसायनों के अनावश्यक प्रयोग से खेतों को होने वाले नुकसान की तरफ भी ध्यान दिलाया. उन्होने कहा कि 2014 पहले कारीगरों को बदहाल बनाया गया, उनके बनाए उत्पादों को बेकार कहा गया, परिणामस्वरूप वो बाजारों से बाहर हो गए.
2017 के बाद हमने पुनः एक जिला एक उत्पाद शुरू करके डिजाइन, पैकेजिंग को शुरू किया. बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया. आज हमारा निर्यात दो लाख करोड़ को पार कर गया है, इसका सबसे प्रमुख कारण हमारा एमएसएमई सेक्टर है.
एमएसएमई सेक्टर को हमने खुली छूट दी, जिसके परिणामस्वरूप 96 लाख यूनिटों में तीन करोड़ लोग कार्य कर रहे. आज हमारा रोजगार रेट 3 प्रतिशत के नीचे आ चुका है. अनुसंधान एवं नवाचार पर सभी को जोड़ने की जरूरत है. उन्होंने जीवक के तक्षशिला विश्वविद्यालय में आयुर्वेद अध्ययन को रेखांकित करते हुए सभी को वनस्पतिय गुण को बताया.
विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो शेखर पांडेय ने अपने संबोधन में सभी का स्वागत करते हुए बताया गया कि विज्ञान भारती की शुरुआत 1991 में समाज के सामने बहुत आदर भाव से विज्ञान की उपलब्धियां रखने हेतु हुई थी.
इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों के स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु लगभग 150 करोड़ की लागत से 200 बिस्तरों वाला 7 मंजिला बन रहे अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया.
उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदाई संस्था के अभियंता को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर प्राथमिकता पर समय से कार्य पूरा करायें जाने हेतु निर्देशित किया. निर्माण कार्य में मानक के अनुरूप उच्च गुणवत्ता प्रत्येक दशा में सुनिश्चित किये जाने पर जोर देते हुए बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्माण कार्य पर विशेष निगरानी किये जाने हेतु निर्देशित किया.
विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन विज्ञान भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री अंकित राय ने जानकारी दी कि यह राष्ट्रीय अधिवेशन संवाद, सहयोग एवं नीति-निर्माण के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा जो भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
