दिल्‍ली-एनसीआर भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विरासत पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, प्रो. मनीषा मिश्रा अग्निहोत्री की किताब भी लॉन्च हुई
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भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विरासत पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, प्रो. मनीषा मिश्रा अग्निहोत्री की किताब भी लॉन्च हुई

नई दिल्ली : भारतीय सभ्यता, संस्कृति, विरासत, महात्मा गांधी और देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर चर्चा के लिए दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह सम्मेलन 8 और 9 अक्टूबर 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर में हो रहा है. सम्मेलन का विषय Revisiting the Contours of Indian Civilisation: Culture, Heritage, Gandhi & Indigenous Epistemologies रखा गया है. इसका आयोजन कॉलेज के IQAC के तहत Heritage – The History Association, Gandhi Study Circle और Heritage Club ने किया है. सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्वान भारतीय इतिहास और सभ्यता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे हैं.

उद्घाटन सत्र में कई विद्वानों ने रखे विचार
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. स्वाति पाल, अनुराधा कृष्णा और प्रो. प्रभु मोहापात्रा ने अपने विचार रखे. वहीं प्रो. अमर फारूकी ने मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित किया. उद्घाटन सत्र में मध्यकालीन भारत, भारतीय संस्कृति और इतिहास को अलग-अलग नजरिए से समझने पर भी चर्चा हुई. प्रो. स्वाति पाल ने कहा कि मध्यकालीन दौर में भी भारत को देखने के लिए सिर्फ एक नजरिया नहीं था. उस समय भी भारत और उसकी परंपराओं को अलग-अलग नजरिए से समझा जाता था.

हिंदू धर्म और मध्यकालीन भारत पर किताब जारी
कार्यक्रम में प्रो. मनीषा मिश्रा अग्निहोत्री की किताब Hindus and Their Religion in Medieval India: A Study Based on the Works of Abul Fazl, ‘Mobed’, and Dara Shukoh का विमोचन भी किया गया. किताब में मध्यकालीन भारत में हिंदू धर्म और परंपराओं को समझने की कोशिश की गई है. इसके लिए अबुल फजल, ‘मोबेद’ और दारा शिकोह के कार्यों का अध्ययन किया गया है. किताब में खास तौर पर यह समझने की कोशिश की गई है कि मध्यकालीन भारत में फारसी लेखकों और विद्वानों ने हिंदू परंपराओं को किस तरह देखा और समझा. किताब के बारे में प्रो. मनीषा मिश्रा अग्निहोत्री ने कहा कि यह उनके लिए मध्यकालीन भारत में फारसी लोगों और विद्वानों के हिंदू परंपराओं से जुड़ाव के सवाल पर लंबे समय से चल रहा बौद्धिक अध्ययन है.

किताब विमोचन में कई लोग रहे मौजूद
पुस्तक विमोचन के दौरान प्रो. मनीषा मिश्रा अग्निहोत्री के साथ प्रो. स्वाति पाल, प्रो. अमर फारूकी, प्रो. नजफ हैदर, प्रो. प्रभु मोहापात्रा, मंजरी चतुर्वेदी और डॉ. प्रसून चटर्जी मौजूद रहे. प्रकाशक संस्था प्राइमस बुक्स के डॉ. प्रसून चटर्जी ने प्रो. अग्निहोत्री के साथ काम करने के अनुभव को मध्यकालीन इतिहास के दो विद्यार्थियों के बीच हुए बौद्धिक संवाद की प्रक्रिया बताया.

कल 9 अक्टूबर को कार्यक्रम के दूसरे दिन सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक “भारत में विरासत, ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता” विषय पर पैनल चर्चा होगी. इसकी अध्यक्षता प्रो. नदीम रेजवी करेंगे, जबकि प्रो. यूजेनिया वैनिना, मंजरी चतुर्वेदी, प्रो. रजिउद्दीन अकील और डॉ. मुकेश कुमार अपने विचार रखेंगे. दोपहर 12 से 2 बजे तक दास्तानगोई व्याख्यान-सह-प्रदर्शन का आयोजन होगा, जिसमें पूनम गिरधानी और अमीना सय्यदा प्रस्तुति देंगी.

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