दिल्ली: 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड से राष्ट्रीय समारोह का नेतृत्व किया. इस वर्ष योग दिवस का विषय ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए योग को आजीवन अभ्यास के रूप में बढ़ावा देना है.
सुबह से जारी मुख्य कार्यक्रम में हजारों लोगों ने कॉमन योगा प्रोटोकॉल का अभ्यास किया, जबकि भारत और विदेशों से लाखों लोग वर्चुअल माध्यम से जुड़े. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक और पूर्वोत्तर से लेकर सौराष्ट्र तक पूरा भारत योग की ऊर्जा से सराबोर दिखाई दे रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और योग का संबंध हजारों वर्षों पुराना है. भारत की प्राचीन परंपराओं से निकला योग आज एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है, जो शारीरिक फिटनेस, मानसिक शांति और समग्र कल्याण का माध्यम बन रहा है.
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के समन्वय से दुनिया भर में 210 से अधिक भारतीय दूतावासों और मिशनों ने लगभग 2,500 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए.
मुख्य समारोह से पहले आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 6 लाख से अधिक संगठनों और संस्थानों का पंजीकरण दर्ज किया. मंत्रालय के अनुसार यह योग को जन-जन तक पहुंचाने के प्रति लोगों के बढ़ते उत्साह और सहभागिता का प्रमाण है.
योग विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं में से एक माना जाता है. इसकी जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक पहुंचती हैं. संस्कृत का ‘योग’ शब्द ‘जोड़ने’ या ‘एकता’ का प्रतीक है. वेदों, उपनिषदों, बौद्ध और जैन साहित्य के साथ-साथ महाभारत और रामायण में भी योग का उल्लेख मिलता है. बाद में महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से इसकी दार्शनिक और व्यावहारिक संरचना को व्यवस्थित रूप प्रदान किया.