दिल्ली: प्रधानमंत्री ने गुजरात में जल संचय, जन भागीदारी पहल की शुरुआत की. प्रधानमंत्री वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े. कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि ‘यह बेहद अहम पहल है, जिसकी गुजरात की धरती से शुरुआत हो रही है. जल शक्ति मंत्रालय ने इस पहल की शुरुआत की है. हाल के दिनों में देश के हर कोने में भारी बारिश से तबाही जारी है.
देश को कोई हिस्सा ही शायद होगा, जिसने इस प्राकृतिक आपदा की वजह से संकट न झेला हो. इस बार गुजरात को भी भारी संकट का सामना करना पड़ा. हमारी सारी व्यवस्थाओं में भी इतनी क्षमता नहीं है कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में हमारी मदद कर सकें, लेकिन गुजरात के लोगों और अन्य देशवासियों में ये आदत है कि संकट की घड़ी में सभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘जल संरक्षण सिर्फ एक नीति नहीं है बल्कि यह एक प्रथा है. यह हमारी जिम्मेदारी भी है. जब भावी पीढ़ियां हमारा आकलन करेंगी तो हमारा जल के प्रति जो रवैया है, उसका भावी पीढ़ी सबसे पहले आकलन करेंगी. यह जीवन-मरण का सवाल है और यह मानवता के भविष्य का सवाल है.
भारत में जनभागीदारी और जनआंदोलन से जल संरक्षण और प्रकृति संरक्षण का अनूठा अभियान चल रहा है। आज गुजरात के सूरत में 'जल संचय जनभागीदारी पहल' का शुभारंभ कर अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है।https://t.co/Qg27AbPj1f
— Narendra Modi (@narendramodi) September 6, 2024
इस कार्यक्रम का लक्ष्य गुजरात में वर्षा जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण में आम लोगों, स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों को एकजुट करना है. इसके अंतर्गत समूचे गुजरात में करीब 24 हजार 800 वर्षा जल संरक्षण निकायों का निर्माण सामुदायिक भागीदारी के साथ किया जा रहा है.
ये निकाय भूमि जल-पुनर्भरण संरचनाओं के रूप में काम करेंगे, जिनसे वर्षा जल संचय तथा दीर्घावधि जल प्रबंधन में मदद मिलेगी. इन संरचनाओं से समुदाय संचालित जल संचय के क्षेत्र में गुजरात की सफलता उजागर होगी और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व को बढ़ावा मिलेगा. जल संचय, जन भागीदारी कार्यक्रम ऐतिहासिक पहल है, जो अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है. प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को हमेशा राष्ट्रीय मिशन के रूप में महत्वपूर्ण माना है.
