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आज़ादी के 78 साल बाद मिज़ोरम की पहली रेल सेवा, पीएम मोदी 13 सितंबर को दिखाएंगे हरी झंडी - TV News Today
दिल्‍ली-एनसीआर आज़ादी के 78 साल बाद मिज़ोरम की पहली रेल सेवा, पीएम मोदी 13 सितंबर को दिखाएंगे हरी झंडी
दिल्‍ली-एनसीआर

आज़ादी के 78 साल बाद मिज़ोरम की पहली रेल सेवा, पीएम मोदी 13 सितंबर को दिखाएंगे हरी झंडी

दिल्‍ली: देश में आज भी एक राज्य ऐसा था जहां पर ट्रेन नहीं जाती थी. क्योंकि, वहां तक रेल लाइन नहीं बिछ पाई थी. लेकिन, अब आजादी के 78 साल बाद देश के इस हिस्से में केंद्र सरकार ने नया रेलवे ट्रैक तैयार कर दिया है. अब आजादी के इतने सालों बाद मिजोरम की राजधानी आइजोल रेलवे के नक्शे पर आएगी.

बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन अब तैयार हो गई है, जो यहां के लोगों के लिए लाइफलाइन साबित होगी. यात्रियों का सफर आसान होगा तो व्यापार की उम्मीदों को भी पंख लगेंगे. 13 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन करेंगे. यहां से ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे.

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट का खाका 26 साल पहले 1999 में तैयार हुआ था. दुर्गम पहाड़ों, घने जंगलों और भारी बारिश ने शुरुआती सर्वे को ही बेहद चैलेंजिंग बना दिया. इतनी अवधि में कई बार सर्वे रिपोर्ट बदली गई.

2008–09 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा मिला. प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में इस परियोजना का शिलान्यास किया और 11 साल की कोशिश के बाद अब इसमें सफलता मिली है. इस रेल लाइन की लंबाई 51 किलोमीटर से ज्यादा है. चार स्टेशन बनाए गए हैं. 48 टनल इस लाइन पर बनाई गई हैं जो लगभग 13 किलोमीटर लंबी हैं. 55 बड़े ब्रिज और 27 छोटे ब्रिज तैयार किए गए हैं.सबसे खास बात ये है कि एक ब्रिज की ऊंचाई दिल्ली की कुतुब मीनार से भी ज्यादा है. ब्रिज की ऊंचाई 104 मीटर है, जबकि कुतुब मीनार 72.5 मीटर ही ऊंची है. ट्रैक की स्पीड भी 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. यह रेल लाइन बन जाने से बैराबी से आइजोल तक पहुंचने में अब सिर्फ एक से डेढ़ घंटा ही लगेगा. जबकि, पहले 5 से 6 घंटे खर्च होते थे.

कई बार इस रूट का सर्वे किया गया जो पूरा नहीं हो सका और उसमें बदलाव भी हुए. जब यह नेशनल प्रोजेक्ट बना तब जाकर अब काम पूरा हुआ. रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस लाइन से कोलकाता, अगरतला और दिल्ली के लिए ट्रेनें चलेंगी. इससे मिजोरम का अन्य राज्यों से जुड़ाव हो जाएगा.

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक मिजोरम की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ये काम बहुत ही चैलेंजिंग रहा. साल में सिर्फ 4 से 5 माह ही निर्माण संभव हो पाता था. भारी मशीनों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर साइट पर जोड़ा गया. असम-पश्चिम बंगाल से निर्माण सामग्री लानी पड़ी. प्रोजेक्ट से पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में से 4 त्रिपुरा (अगरतला), असम (दिसपुर), अरुणाचल प्रदेश (ईटानगर) और मिजोरम (आइजोल) सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई हैं. यह नॉर्थ ईस्ट के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

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