दिल्‍ली-एनसीआर CJP ने शुरू किया ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली दूर करने का लक्ष्य
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CJP ने शुरू किया ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली दूर करने का लक्ष्य

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए देशव्यापी नागरिक अभियान ‘स्कूल ठीक करो’ शुरू किया है. अभियान के तहत ग्रामीण परिवारों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को स्कूलों की सुविधाओं का जायजा लेने और पंचायतों व प्रशासन के सामने समस्याएं उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. CJP ने अगले दो महीने में कम से कम 100 स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य रखा है.

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि अब संगठन का फोकस केवल समस्याओं को सामने रखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान के लिए काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए बिना देश का विकास संभव नहीं है. CJP का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चे प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के लिए भी छह से सात किलोमीटर तक पैदल जाने को मजबूर हैं. मानसून में कीचड़, गर्मियों में तेज गर्मी और सर्दियों में ठंड के बीच बच्चों की यह यात्रा उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है.

अभियान के तहत CJP ने ‘सरपंच चैलेंज’ शुरू किया है. इसमें अभिभावकों और युवाओं से अपने गांव के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने और वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाने की अपील की गई है. CJP के मुताबिक, नागरिक स्कूलों में चार जरूरी सुविधाओं की जांच करेंगे. इनमें लगातार बिजली, साफ और सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ एवं चालू शौचालय और पौष्टिक व स्वच्छ तरीके से तैयार किया गया मिड-डे मील शामिल है. इन सुविधाओं की कमी मिलने पर स्थानीय पंचायत और प्रशासन के सामने मामला उठाया जाएगा.

अभियान के तहत नागरिकों को स्कूलों में मौजूद कमियों की तस्वीरें और अन्य जानकारी मोबाइल फोन के माध्यम से दर्ज करने के लिए कहा गया है. CJP का दावा है कि इस रिकॉर्ड को संबंधित अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर जवाबदेही तय करने की कोशिश की जाएगी. संगठन ने ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसेमंद स्कूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की है, जिससे बच्चों को लंबी दूरी तक पैदल चलकर स्कूल जाने की मजबूरी से राहत मिल सके.

CJP ने स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए 30 दिन की स्थानीय निगरानी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है. पहले 15 दिनों में समुदाय स्कूल की कमियों का ऑडिट कर संबंधित अधिकारियों को जानकारी देगा और यह देखा जाएगा कि सुधार कार्य शुरू हुआ या नहीं. इसके बाद 16वें से 30वें दिन तक नागरिक मरम्मत और निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखेंगे. संगठन का कहना है कि इससे काम की गुणवत्ता और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की भी निगरानी की जा सकेगी.

CJP ने अभियान के शुरुआती चरण में कम से कम 100 सरकारी स्कूलों को बेहतर स्थिति में लाने का लक्ष्य रखा है. संगठन का कहना है कि इन स्कूलों को मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा, जिससे सफल व्यवस्था को देश के अन्य गांवों के स्कूलों में भी लागू किया जा सके.

CJP ने गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा को राजनीतिक दलों से ऊपर का मुद्दा बताते हुए जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है. संगठन ने सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ ग्रामीण शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए. CJP ने ‘स्मार्ट सिटी’ जैसी शहरी योजनाओं के साथ ग्रामीण विकास को भी प्राथमिकता देने की मांग की है.

स्वतंत्रता दिवस से पहले CJP ने सांसदों, विधायकों और अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण बच्चों के लिए बेहतर स्कूल उपलब्ध कराने की अपील की है. संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है, जिससे वह कम उम्र में काम करने के लिए मजबूर न हों.

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