दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया है कि सरकार ने उनके प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के लिए संपर्क किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से सुबह बातचीत के लिए संदेश मिला, जिसके बाद वह और पार्टी नेता आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने के लिए रवाना हुए हैं.
सौरभ दास ने अपने पोस्ट में लिखा कि आंदोलनकारी युवाओं की बड़ी संख्या जंतर-मंतर पर मौजूद है और उनकी मांगें पूरी तरह स्पष्ट हैं. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है या नहीं और यदि होती है तो उसका क्या परिणाम निकलता है.
CJP delegation meets JP Nadda, makes three demands including resignation of Dharmendra Pradhan
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— ANI Digital (@ani_digital) July 20, 2026
बीते कई दिनों से जारी प्रदर्शन के बाद सोमवार को CJP समर्थकों ने संसद की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी मांगों को सीधे संसद और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहते हैं. हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच धक्का-मुक्की और हल्की झड़प की भी खबरें सामने आईं. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जिसके बाद हालात सामान्य किए गए. आंदोलनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं.
यदि CJP प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच मुलाकात होती है, तो यह आंदोलन के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है. आंदोलनकारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से औपचारिक वार्ता की मांग कर रहे थे. अब सरकार से संपर्क के दावे के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता निकल सकता है.
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी और सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाएगी. राजनीतिक हलकों में भी इस संभावित वार्ता को लेकर उत्सुकता बनी हुई है.
सोनम वांगचुक ने रखी थीं तीन प्रमुख शर्तें
1. इससे पहले आंदोलन से जुड़े सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन समाप्त करने के लिए 3 प्रमुख शर्तें रखी थीं. उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा एक पत्र में कहा था कि सरकार सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे.
2. दूसरी शर्त के तहत उन्होंने मांग की थी कि उन्हें और CJP नेतृत्व को संसद तक शांतिपूर्वक पहुंचने की अनुमति दी जाए, ताकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात जनप्रतिनिधियों के सामने रख सकें.
3. तीसरी शर्त में उन्होंने कहा था कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद सार्वजनिक रूप से भरोसा दें कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे. यदि किसी कारणवश ऐसा संभव न हो, तो वे अस्पताल पहुंचकर लिखित रूप में यह आश्वासन दें कि आंदोलन से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा.
फिलहाल आंदोलन ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत निर्णायक साबित हो सकती है. यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त होने की संभावना बढ़ सकती है. वहीं, यदि वार्ता बेनतीजा रहती है तो आंदोलन आगे और तेज होने की आशंका भी बनी रहेगी.
आने वाले घंटों में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रस्तावित बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है. फिलहाल जंतर-मंतर और राजनीतिक गलियारों में इसी घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
