दिल्ली: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दिया गया है. नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता ले सकते हैं.
संविधान के अनुसार, राज्यसभा के लिए चुने जाने के 14 दिनों के अंदर विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी होता है. यदि ऐसा नहीं किया जाता तो राज्यसभा की सदस्यता खुद समाप्त हो जाती है. मुख्यमंत्री ने इस संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए आज 30 मार्च को इस्तीफा सौंप दिया. इससे पहले उन्हें 16 मार्च को चुनाव प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुका था.
नीतीश कुमार पहली बार 2006 में विधान परिषद के सदस्य बने थे. उसके बाद 2012, 2018 और 2024 में लगातार चौथी बार उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता ली थी. विधान परिषद की सदस्यता छह वर्ष के लिए होती है। उनके टर्म इस प्रकार रहे- 2006-2012, 2012-2018, 2018-2024 और 2024 से अब तक. आज इस्तीफा देकर उन्होंने इस लंबे सफर को समाप्त कर दिया है.
नवंबर 2005 में पहली बार बिहार की सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने हमेशा विधान परिषद के रास्ते मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा. 1985 में हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद वे लोकसभा सदस्य भी रहे और केंद्र में मंत्री पद भी संभाला. लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की बजाय विधान परिषद की सदस्यता को प्राथमिकता दी.
राज्यसभा सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार अब चारों सदनों के सदस्य बन जाएंगे. उन्होंने पहले विधानसभा (विधायक), फिर लोकसभा (सांसद), उसके बाद विधान परिषद और अब राज्यसभा की सदस्यता हासिल कर ली है. यह उनके राजनीतिक करियर में एक अनोखा उपलब्धि मानी जा रही है.
विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना होगा. हालांकि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार वे छह महीने तक बिना विधान परिषद या विधानसभा की सदस्यता के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं. इस दौरान उन्हें या तो विधानसभा चुनाव लड़कर सदस्यता हासिल करनी होगी या फिर कोई अन्य रास्ता अपनाना होगा.
1985 से शुरू हुए नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर में राज्यसभा जाना एक नया अध्याय जोड़ रहा है. लंबे समय तक विधान परिषद पर निर्भर रहने के बाद अब वे ऊपरी सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे. 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता लेने के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन का यह नया चरण शुरू होगा.
