उत्तराखंड: संचालित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के तहत तमाम महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया. इस दौरान सीएम धामी ने योजना के द्वितीय चरण के तहत 212 नई महिला लाभार्थियों को पहले किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपए की सहायता राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर की.
इसके साथ ही इस योजना के पहले चरण की 276 महिला लाभार्थियों को दूसरी किश्त के रूप में 1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपए की सहायता राशि भी डीबीटी के जरिए ट्रांसफर की गई. इस तरह कुल 488 महिला लाभार्थियों को 2 करोड़ 76 लाख 16 हजार 875 रुपए की सहायता राशि दी गई. इस योजना के पहले चरण में 10 फरवरी 2026 को 484 महिला लाभार्थियों को 3 करोड़ 45 लाख की सहायता राशि दी गई थी.
आज प्रदेश में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं "लखपति दीदी" बन चुकी हैं, जबकि 5 लाख से अधिक महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और उद्यमिता की नई मिसाल स्थापित कर रही हैं।
इस अवसर पर माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती @rekhaaryaoffice जी उपस्थित रही। pic.twitter.com/tPjR8DFoGl
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 22, 2026
सीएम धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का मकसद एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं के साथ एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं और ट्रांसजेंडर को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. योजना के तहत महिलाओं को उनके निवास स्थान या स्थानीय क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपए तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है, जिसमें 75 फीसदी तक सब्सिडी राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती है.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है. राज्य सरकार 15 हजार से ज्यादा महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों एवं लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा उपलब्ध करा रही है. ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के जरिए प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है.
वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं. 7 हजार से ज्यादा ग्राम संगठन और 500 से ज्यादा क्लस्टर संगठन महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व को सशक्त बना रहे हैं. वहीं, 2 लाख 65 हजार से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. राज्य सरकार महिलाओं के हाथों से तैयार किए जा रहे उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए भी सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर रही है.
