उत्तर प्रदेश: भगवान जगन्नाथ बीमार हैं. यह सुनकर आपको थोड़ी हैरत होगी. जी हां, हम बिल्कुल सही कह रहे हैं. भगवान जगन्नाथ इन दिनों बुखार से पीड़ित हैं. उनका दो डॉक्टर इलाज कर रहे हैं. उन्हें खाने में खिचड़ी दी जा रही है. वहीं, रात-दिन काढ़े का सेवन कराया जा रहा है ताकि वह शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएं. डॉक्टरों का कहना है कि भगवान एक दो दिन में पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे. चलिए जानते भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इस अनोखी मान्यता के बारे में.
प्रयागराज में भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रबंधक गगन गुप्ता की मानें तो मान्यता है कि रथ यात्रा से पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 घड़ों से सुगंधित जल से स्नान कराया जाता है. इस रस्म को स्नान यात्रा कहा जाता है. इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं. उन्हें अत्याधिक स्नान की वजह से बुखार आ जाता है. इसके बाद वह एकांतवास में चले जाते हैं. इस दौरान उनके पास चिकित्सकों को छोड़कर किसी भी भक्त को जाने की अनुमति नहीं दी जाती है. उनका विधिवत इलाज चलता है. इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद उन्हें उस स्थान से निकाला जाता है.
मान्यता है कि भगवान बीमार होने के 14 दिन तक मौसी के घर पर विश्राम करते हैं. तब तक उनका औषधियों से इलाज चलता हैं. वह शीघ्र स्वस्थ हो जाएं इसके लिए उन्हें काढ़ा आदि अर्पित किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जब भगवान पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं तो वह नगर भ्रमण को निकलते हैं. इस दौरान वह भक्तों पर आशीर्वाद बरसाते हैं. इस वर्ष रथयात्रा 27 जून को हैं. भगवान उस दिन स्वस्थ होकर रथ पर सवार होकर निकलेंगे और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाएंगे.
मंदिर प्रबंधक गगन गुप्ता की मानें तो इसके पीछे एक और मान्यता भी है. एक समय पुरी में माधवदास नामक एक भक्त रहते था. वह प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ की पूजा-आराधना करते थे. एक दिन उन्हें गंभीर रोग हो गया. इतनी कमजोरी हो गई कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया जब माधवदास बिल्कुल अस्वस्थ हो गए तब स्वयं भगवान जगन्नाथ एक सामान्य सेवक के रूप में उनके घर आए और उनकी सेवा करने लगे. जब माधवदास को होश आया तो उन्होंने भगवान को पहचान लिया और कहा प्रभु आप त्रिलोक के स्वामी होकर मेरी सेवा क्यों कर रहे हैं? यदि आप चाहते तो मेरा रोग ही समाप्त कर सकते थे.
इस पर भगवान ने उत्तर दिया कि भक्त की पीड़ा मुझसे देखी नहीं जाती इसलिए स्वयं सेवा करने आया हूं. परंतु हर व्यक्ति को अपना कर्म भोगना ही पड़ता है. तुम्हारे पास में जो 15 दिन का रोग शेष है वह मैं अपने ऊपर ले रहा हूं. इस वजह से हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जब भगवान स्वस्थ होते हैं, तब अपने भक्तों के बीच भ्रमण के लिए रथ यात्रा पर निकलते हैं.
