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अंतरराष्ट्रीय सम्मानित गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार देश के दिग्गज कथाकार (से. रा. यात्री) 91 वर्षीय, से एक वार्ता - TV News Today
उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय सम्मानित गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार देश के दिग्गज कथाकार (से. रा. यात्री) 91 वर्षीय, से एक वार्ता
उत्तर प्रदेश

अंतरराष्ट्रीय सम्मानित गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार देश के दिग्गज कथाकार (से. रा. यात्री) 91 वर्षीय, से एक वार्ता

सुशील कुमार शर्मा

गाजियाबाद : महानगर के नवरत्नों में शुमार देश के दिग्गज कथाकार से.रा. यात्री (91 वर्ष) अपने स्थानीय कविनगर स्थित आवास में कई वर्षों से बिस्तर पर पड़े हैं. इसी स्थिति में वह उनसे मिलने आने वाले प्रख्यात साहित्यकारों का अभिवादन और स्नेह भी स्वीकार करते हैं तथा साहित्यिक चर्चा भी करते हैं. इस बीच वह अपनी पत्नी और दो बेटियों को खोने का दुःख भी सह चुके हैं। उल्लेखनीय है से. रा. यात्री की 300 से अधिक कहानियां, 40 से अधिक कहानी संग्रह, 32 से अधिक उपन्यास के अलावा अनेक संस्मरण, व्यंग्य और साक्षात्कार की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.

विगत 50 वर्षों से देश के हिन्दी के प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं-साप्ताहिक हिंदुस्तान, धर्मयुग, ज्ञानोदय, कादम्बिनी, सारिका, साहित्य अमृत, साहित्य भारती, बहुवचन, नई कहानियां, कहानी, पहल, श्रीवर्षा, शुक्रवार, नई दुनिया, वागर्थ, रविवार आदि तमाम प्रमुख पत्र- पत्रिकाओं में उनके कहानी, उपन्यास, साक्षात्कार, संस्मरण, समीक्षा, लेख , व्यंग्य आदि का प्रकाशित होते रहे है. दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनका रचनापाठ निरंतर होता रहा है तथा विभिन्न मीडिया चैनल्स से समय -समय साक्षात्कार भी प्रसारित होते रहे हैं.

वर्ष 1987 से वर्ष 2003 तक हिन्दी की महत्वपूर्ण पत्रिका “वर्तमान साहित्य” का उन्होंने सम्पादन किया है. दुनिया के नामचीन विचारकों, चिंतकों, लेखकों, कवियों व राष्ट्राध्यक्षों आदि के मध्य हुए‌ पत्राचार पर “चिट्ठियों की दुनिया” पुस्तक का भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशन (वर्ष 2013). देश के प्रगतिशील लेखकों की चर्चित कहानियों के संग्रह “विस्थापित ” का सम्पादन. वर्ष 2009 में उनकी कहानी “दूत” पर दूरदर्शन ने फिल्म का निर्माण भी किया है.

देश के कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में उनकी कहानियों को शामिल किया गया है। देश के दो दर्जन से अधिक शोधार्थियों द्वारा उनके लेखन पर शोध किया गया है और जारी है। उन्हें मिले सम्मानों और पुरस्कारों की भी लम्बी श्रृंखला है. उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा उनकी “धरातल” कहानी संग्रह वर्ष 1979 में पुरस्कृत, “सिलसिला” कहानी संग्रह वर्ष 1980 में पुरस्कृत, “अकर्मक क्रिया” कहानी संग्रह वर्ष 1983 में पुरस्कृत , “अभयदान” कहानी संग्रह वर्ष 1997 में पुरस्कृत, वर्ष 2004 में उन्हें “साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित किया गया. वर्ष 2008 में उन्हें “महात्मा गांधी साहित्य सम्मान” से सम्मानित किया गया.

वर्ष 1986 में उन्हें समग्र लेखन के लिए ” सावित्री देवी शेर सिंह चौधरी सम्मान”, वर्ष 1993 में उन्हें राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, डूंगरपुर (राजस्थान) द्वारा ” साहित्य श्री” सम्मान, वर्ष 1998 में “राजस्थान पत्रिका” द्वारा जयपुर में आयोजित समारोह में उनकी कहानी “विरोधी स्वर” के लिए उन्हें सम्मानित किया गया. वर्ष 1999 में उनकी पुस्तक (संस्मरण) “लौटना एक वाकिफ उम्र का” के लिए उन्हें प्रतिष्ठित “सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सम्मान” से नवाजा गया. वर्ष 2007 में उन्हें समन्वय संस्था द्वारा “सारस्वत सम्मान” से सम्मानित किया गया. वर्ष 2017 में उन्हें सेतु साहित्यिक पत्रिका के पिट्सबर्ग (अमेरिका) के शिखर सम्मान से अलंकृत किया गया.

उनके कहानी संग्रह हैं- दूसरे चेहरे, अलग -अलग अस्वीकार, काल विदुषक, धरातल,केवल पिता, सिलसिला, अकर्मक क्रिया, विस्थापित, टापू पर अकेले, खंडित संवाद, नया संबंध,भूख तथा अन्य कहानियां, अभय दान, चर्चित कहानियां,पुल टूटते हुए, खारिज और बेदखल, विरोधी स्वर,इक्कीस पुरस्कृत कहानियां, परजीवी,राग पर्व,घाटे का भविष्य,मंजिल की तलाश, असमर्थताओं के विरुद्ध, फिर से इंतज़ार, खंडित संवाद, बहरूपिया, मेरी चुनिंदा कहानियां, विदा की तकलीफ़ , से. रा. यात्री की लोकप्रिय कहानियां व दूसरे चेहरे.  उनके उपन्यास हैं-दराजों में बंद दस्तावेज,लौटते हुए, चांदनी के आर -पार, बीच की दरार,अंजान राहों का सफर,कई अंधेरों के पार,दराजों में बंद दस्तावेज,बनते बिगड़ते रिश्ते,चादर के बाहर, प्यासी नदी,भटकता मेघ, आकाशचारी, आत्मदाह,बावजूद, एक छत के अजनबी,प्रथम परिचय, दिशाहारा,अंतहीन,प्रथम परिचय,जली रस्सी, टूटते दायरे,युद्ध अविराम,अपरिचित शेष,बेदखल अतीत,आखिरी पड़ाव, सुबह की तलाश,घर न घाट, एक जिंदगी और,अनदेखे पुल,बैरंग खत,टापू पर अकेले, दूसरी बार,दराजों में बंद दस्तावेज , दरारों के बीच, मायामृग,कलंदर,जिप्सी स्कालर,सुरंग के बाहर,नदी पीछे नहीं मुड़ती,बिखरे तिनके,समीप और समीप व गुमनामी के अंधेरे में। उनके व्यंग्य हैं -किस्सा एक खरगोश का,कोई नाम न दो व दुनिया मेरे आगे. उनका संस्मरण है -लौटाना एक वाकिफ उम्र का। उनकी संपादित पुस्तकें हैं -रंग और रेखाएं,उपेन्द्र नाथ “अश्क ” सृजन और व्यक्तित्व व चिट्ठियों की दुनिया।

वह स्वस्थ रहें और चिरायु हों यही कामना है. उनके सुपुत्र आलोक यात्री अपने वरिष्ठ साथी प्रख्यात आलोचक एवं व्यंग्य लेखक सुभाष चन्दर व सहयोगी सेवानिवृत्त वरिष्ठ अभियंता शिव राज सिंह, शिक्षाविद माला कपूर व प्रख्यात शायर गोविन्द गुलशन के साथ प्रति माह होटल रेडबरी ( निकट कालकागढी चौक) में कथा- संवाद (कहानी लेखकों की कार्यशाला) एवं सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल, नेहरू नगर में (फ्लाई ओवर के नीचे) महफ़िल ए बारादरी का नियमित आयोजन कर इस महानगर में नियमित साहित्यिक आयोजन करने में महती भूमिका निभा रहे हैं.

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