उत्तराखंड: आज विधानसभा सत्र का तीसरा दिन है. सदन की कार्यवाही को 11 बजे शुरू कर दिया गया. तीसरे दिन सदन की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई. सदन में यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड ) विधेयक पर चर्चा हो रही है.
कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने कहा कि जल्दबाजी में सरकार यूसीसी पारित करना चाहती है. केंद्र के मसले को राज्य में लागू करना जल्दबाजी है. बेहड़ ने कहा बिल को प्रवर समिति के अधीन भेजना चाहिए. जिस पर विस्तार से चर्चा हो. उन्होंने कहा सभी विधायकों की मसौदे को लेकर राय ली जानी चाहिए.
कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने कहा कि लड़की की शादी होने पर बराबार का अधिकार देने से कोर्ट कचहरी के मामले अधिक बढ़ जाएंगे. लड़कियों के ससुराल वाले बहुओं को बराबर संपत्ति का अधिकार दिलाने के लिए प्रताड़ित करेंगे.
कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने कहा कि यूसीसी बिल का अध्ययन करने के लिए जो समय दिया है वो बेहद काम है. दो घंटे में अगर बिल पढ़ने में सक्षम होते तो फिर हम यहां नही कही और होते. चौहान ने कहा मुस्लिम महिलाएं अगर इद्दत शोक के लिए करना चाहती है तो इसमें क्या गलत है.
नेता उप प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि शादी का रजिस्ट्रेशन 2006 में ही लागू हो गया था। लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल और लड़कों की उम्र 21 साल भी पहले से ही थी. लड़कियों का संम्पति में बराबर का अधिकार भी पहले से ही है तो फिर ucc में नया क्या है? कापड़ी ने कहा कि यूसीसी के नाम पर ये कॉपी कट पेस्ट किया गया है.
नेता उप प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप को बैन किया जाना चाहिए था. लेकिन यूसीसी में लिव इन रिलेशन को लेकर इस तरह के प्रावधान को शामिल कर उत्तराखंड की पहचान बदल दी है. अब देवभूमि लिव इन रिलेशनशिप के नाम से जाना जाएगा। कापड़ी ने कहा कि इस तरह की मान्यता मिलने के बाद उत्तराखंड में लोग लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए आएंगे.
कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने सदन में व्यवस्था के तहत सवाल उठाया है. हृदयेश ने मुख्यमंत्री की घोषणा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गैरसैंण में सीएम धामी के द्वारा युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी. सीएम ने सदन में कहा था कि पीसीसीएस की भर्ती परीक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे. लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी नहीं हुई है.
