उत्तराखंड: राज्य में मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम 30 जून को समाप्त हो गया है. इसके साथ ही एक जुलाई यानी आज से प्रदेश में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम प्रभावी हो गया है. ऐसे में अब वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिन्होंने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त की हो. वहीं आज से अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू होने के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान मान्यता प्रमाण पत्र वितरित करेंगे. इसको लेकर मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवा सदन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है.
उत्तराखंड राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद अब मदरसों में नई शिक्षा व्यवस्था के तहत दोहरी पाली में पढ़ाई होगी. सुबह की पाली में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय अनिवार्य रूप से बच्चों को पढ़ाए जाएंगे. इसके बाद शाम की पाली में धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान, मानवाधिकार, राष्ट्रीय एकता और नैतिक मूल्यों का भी पाठ बच्चों को पढ़ाया जाएगा.
प्रिय प्रदेशवासियों,
आज से "उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम" प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त हो गए हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी… pic.twitter.com/sh4uZTLV8h
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 1, 2026
अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम की नई व्यवस्था के तहत शिक्षा विभाग के मानकों पर खरा उतरने वाले मदरसों के विद्यार्थियों को राज्य शिक्षा बोर्ड का प्रमाणपत्र भी मिलेगा. प्रदेश में करीब 452 मदरसे संचालित हो रहे हैं. इनमें से करीब 400 मदरसे पहली से आठवीं कक्षा तक और 55 मदरसे नौवीं से 12वीं कक्षा तक संचालित हो रहे हैं.
सीएम धामी ने कहा कि सरकार का संकल्प साफ है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. इसी लक्ष्य के साथ हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
