उत्तराखंड लॉकडाउन में 93 फीसदी तक साफ हो गई थी गंगा, ऋषिकेश में गौमुख जितना साफ था पानी
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लॉकडाउन में 93 फीसदी तक साफ हो गई थी गंगा, ऋषिकेश में गौमुख जितना साफ था पानी

साल 2020 में कोरोना के कारण लगा लॉकडाउन इसानों के लिए भले ही मुश्किल भरा दौर रहा हो, लेकिन प्रकृति के लिए ये लॉकडाउन वारदान साबित हुआ था. वैज्ञानिकों की कुछ स्टडी रिपोर्ट इसकी तरफ इशारा रही है. लॉकडाउन में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने गंगा नदी में कुछ अध्ययन किया था, जिसका रिपोर्ट अब Geochemical Transactions में पब्लिश हुई है. इस रिपोर्ट के आधार पर कहां जा सकता है कि लॉकडाउन में गंगा का प्रदूषण 93 प्रतिशत तक कम हो गया था.

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार साल 1992 में रमेश और शरीन ने गंगा के पानी पर अध्ययन किया था. उस दौरान अलकनंदा नदी का वॉटर पॉल्यूशन इंडेक्स (WPI) 0.10 था. वहीं भागीरथी नदी का WPI 0.12 और गंगा का WPI 0.13 था. इसके बाद मानवीय हस्तक्षेप के कारण गंगा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया है. वीडिया के वैज्ञानिकों की माने तो लॉकडाउन से पहले हरिद्वार में गंगा का वॉटर पॉल्यूशन इंडेक्स 115 के करीब था.

वहीं, साल 2020 में कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण जब सभी तरह की गतिविधियां रूक गई तो गंगा समेत अन्य नदियों के वॉटर पॉल्यूशन इंडेक्स में काफी सुधार हुआ. जिसकी तस्दीक वाडिया की स्टडी रिपोर्ट करती है. दरअसल, लॉकडाउन में वाडिया इंस्टीट्यूट के कुछ वैज्ञानिक ने गंगा समेत अन्य नदियों पर अध्ययन किया.

लॉकडाउन के दौरान वाडिया इंस्टीट्यूट के अध्ययन में अलकनंदा नदी का वॉटर पॉल्यूशन इंडेक्स (WPI) 0.15 मिला. वहीं भागीरथी का WPI 0.13, गंगा का WPI 0.14 और टौंस नदी का WPI 0.18 के आसपास मिला था. वाडिया इंस्टीट्यूट की स्टडी रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन में अलकनंदा नदी में 21 फीसदी, भागीरथी नदी में 32 फीसदी और गंगा नदी में 93 फीसदी वॉटर पॉल्यूशन इंडेक्स कम हुआ है.

इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ समीर तिवारी बताते है कि उन्होंने और उनकी टीम ने लॉकडाउन के दौरान कुल 34 अलग-अलग जंगहों से गंगा और यमुना नदी के पानी का सैंपल लिया था. लॉकडाउन के पहले फेस यानी मई 2020 में गंगा रिवर सिस्टम के लिए 10 जगहों से सैंपल लिए थे. साथ ही यमुना रिवर सिस्टम के लिए 6 जगहों से सैंपल लिए थे.

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