विदेश सबसे ‘खतरनाक जंगली चिड़ियों की फौज’, पलक झपकते कर रही फसलें तबाह
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सबसे ‘खतरनाक जंगली चिड़ियों की फौज’, पलक झपकते कर रही फसलें तबाह

फसलों की रखवाली (Crops Protection) एक बड़ा और कठिन काम है. इसकी वजह यह है कि किसानों को दिन भर के लिए रखवाली के लिए या तो खुद ही बैठना पड़ता है या फिर लोगों को काम कर लगाना पड़ता है जो कि हर किसान के लिए संभव नहीं है. खेतों में बोई जा चुकी फसल को खराब करने के लिए पक्षी बहुत परेशानी पैदा करते हैं और कई बार यह परेशानी बहुत बड़ी मुसीबत हो जाती है. ऐसा ही अफ्रीकी देश केन्या के खेतों (Kenyan Farms) में हो रहा है जहां लाल चौंच वाली क्वेलिया या क्वेले पक्षियों (red-billed quelea bird) ने तांडव मचा रखा है.

quelea birds kisumukenya destroying rice crops

फसलों की रखवाली (Crops Protection) एक बड़ा और कठिन काम है. इसकी वजह यह है कि किसानों को दिन भर के लिए रखवाली के लिए या तो खुद ही बैठना पड़ता है या फिर लोगों को काम कर लगाना पड़ता है जो कि हर किसान के लिए संभव नहीं है. खेतों में बोई जा चुकी फसल को खराब करने के लिए पक्षी बहुत परेशानी पैदा करते हैं और कई बार यह परेशानी बहुत बड़ी मुसीबत हो जाती है. ऐसा ही अफ्रीकी देश केन्या के खेतों (Kenyan Farms) में हो रहा है जहां लाल चौंच वाली क्वेलिया या क्वेले पक्षियों (red-billed quelea bird) ने तांडव मचा रखा है.

 

 

कीनिया के किशूमू शहर के पास हजारों किसानों को लगता है कि क्वेलिया पक्षियों के झुंड ने फसल पिछले पांच साल में सबसे खराब पैदावार होने वाली है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार किशूमू के किसान इन पक्षियों को अपने खेतों से भगा भगा कर परेशान हो चुके हैं. कई किसानों की तो दिन भर चिल्लाने से आवाज तक बैठ गई है.

 

किसानों कहना है कि ये पक्षी बहुत ढीट हो चुके हैं और किसी से नहीं डरते हैं. उन पर कुछ भी फेंका जाए तो वे इसके आदी हो चुके हैं. किसान पक्षियों को डराने के लिए उन पर मिट्टी फेंकते हैं. कभी तो उन्हें दौड़ कर भगाना होता है. पक्षियों के ना होने पर किसान अकेले भी खेत पर काम कर सकते थे. लेकिन अब कम से कम पांच लोग खेत पर काम करने वाले चाहिए होते हैं.

अब तो किसानों को सरकार से गुहार लगानी पड़ रही है कि वह इस मामले में खुद दखल दे. समस्या गंभीर इसलिए है कि अधिकांश किसानों की आजीविका केवल चावल की फसल पर ही निर्भर है. यहां के छोटे किसान दुनिया सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले जंगली पक्षियों की इलाके में हैं और आलम यह है कि अब पूरी तरह से इनके रहमोकरम पर जी रहे हैं.

 

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