दिल्ली : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव के लिए 200 से अधिक सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं. एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.
सूत्र के अनुसार, लोकसभा के 130 सांसदों ने और राज्यसभा के 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस शुक्रवार को संसद के किसी एक सदन में पेश किए जाने की संभावना है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इसे किस सदन में पेश किया जाएगा.
विपक्ष के एक नेता ने बताया कि सांसदों ने नोटिस को लेकर काफी उत्साह दिखाया और आवश्यक संख्या पूरी हो जाने के बाद भी बृहस्पतिवार को कई सांसदों हस्ताक्षर किए.
STORY | 193 opposition MPs sign notice seeking motion for CEC's removal
A total of 130 Lok Sabha MPs and 63 Rajya Sabha MPs have signed notices seeking the removal of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, a source has said.
According to the source, the notice is likely to… pic.twitter.com/ooZUdWt44n
— Press Trust of India (@PTI_News) March 12, 2026
नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा केकम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं.
एक अन्य सूत्र के अनुसार, इस नोटिस पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सभी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि पार्टी अब आधिकारिक रूप से इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है.
यह पहली बार है जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह का नोटिस दिया गया है.
एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सात आरोप लगाए गए हैं, जिनमें “पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण”, “चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना” और “बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना” जैसे आरोप शामिल हैं.
विपक्षी दलों ने कई मौकों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की मदद करने का आरोप लगाया है, खासकर मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है.
खास तौर पर पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है. मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया महाभियोग है जो उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है. महाभियोग केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही लगाया जा सकता है.
सीईसी को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसे पारित होने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है—सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत.

